इंदिरा गांधी की 100वीं जयंती आज, राहुल और मनमोहन ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 100वीं जयंती पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस उपाध्यत्र राहुल गांधी ने शक्ति स्थल जाकर इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी का जन्म 19 नवम्बर 1917 को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नेहरू परिवार में हुआ था। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू और इनकी माता कमला नेहरू थीं। इन्दिरा गांधी (19 नवंबर 1917-31 अक्टूबर 1984) वर्ष 1966 से 1977 तक लगातार 3 पारी के लिए भारत गणराज्य की प्रधानमंत्री रहीं और उसके बाद चौथी पारी में 1980 से लेकर 1984 में उनकी राजनैतिक हत्या तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं।

इंदिरा गांधी भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री थीं। इंदिरा गांधी 1966 से 1980 तक लगातार तीन बार देश की प्रधानमंत्री रहीं उसके बाद 1980 से 1984 तक गांधी चौथी बार प्रधानमंत्री रहीं हालांकि 1984 में इंदिरा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्म-शताब्दी के अवसर पर 19 नवम्बर को कांग्रेस द्वारा प्रदेश, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसी क्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से 19 नवम्बर को सुबह 11 बजे प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय इन्दिरा गांधी भवन, जयपुर पर पुष्पांजलि कार्यक्रम होगा।

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इंदिरा नहीं चाहती थीं पाक युद्धबंदियों को छोड़ना
बांग्लादेश युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के कुछ शीर्ष बुद्धिजीवियों की इस अपील को कठोरतापूर्वक ठुकरा दिया था, कि 93 हजार पाक युद्धबंदियों को जल्द रिहा कर दिया जाए।

लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह के नेतृत्व में बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधिमंडल इंदिरा गांधी से इस उद्देश्य से मिला था। खुशवंत सिंह तब चर्चित इलेस्ट्रेटेड वीकली आॅफ इंडिया के संपादक थे।

खुशवंत ने अपने संपादकीय कौशल से वीकली का सर्कुलेशन 60 हजार से बढ़ा कर 4 लाख कर दिया था। इसको लेकर उनका बड़ा दबदबा था। पर इंदिरा ने उस दबदबे की परवाह नहीं की। इंदिरा गांधी से उस मुलाकात का विवरण खुद खुशवंत सिंह ने ईमानदारी से लिखा है।

जब इंदिरा का दिखा गरम मिजाज
उनके अनुसार ‘एक मुलाकात के दौरान मैंने इंदिरा गांधी का गरम मिजाज देखा। मैं पाकिस्तानी युद्धबंदियों की रिहाई की मांग करने एक प्रतिनिधिमंडल लेकर उनके पास गया था। प्रतिनिधिमंडल में अमेरिका में हमारे भूतपूर्व राजदूत गगन बिहारी मेहता, प्रसिद्ध उर्दू लेखक कृश्नचंदर और ख्वाजा अहमद अब्बास थे।’

खुशवंत सिंह ने लिखा कि मैं उनसे कुछ कहूं, उसके पहले ही इंदिरा जी ने तपाक से मुझे कहा ‘मिस्टर सिंह, आपने पाकिस्तान के युद्धबंदियों के बारे में जो लिखा है, वह सरकार के लिए अत्यधिक परेशानी का सबब बना है।’मैंने भी तपाक से जवाब दिया, ‘यही तो मेरा उद्देश्य था। मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने आपकी सरकार को परेशानी में डाला।’

इस पर इंदिरा गांधी ने बड़ी तिक्तता से खुशवंत से कहा कि ‘आप अपने को शायद महान संपादक मानते हैं, पर आपको राजनीति का क ख ग भी नहीं मालूम’। इस पर खुशवंत का जवाब था, ‘मैं मानता हूं कि मैं राजनीति के बारे में कुछ नहीं जानता। लेकिन नैतिकता के बारे में जरूर जानता हूं। जो नैतिक दृष्टि से गलत है, वह राजनीतिक दृष्टि से सही कैसे हो सकता है?’ इस पर इंदिरा जी ने कहा कि ‘उपदेश के लिए धन्यवाद!’ यह कहते हुए प्रधानमंत्री ने खुशवंत की ओर से मुंह फेर लिया।

अब गगन बिहारी की बारी थी। वयोवृद्ध मेहता बोलना शुरू ही कर रहे थे कि श्रीमती गांधी ने बड़ी रुखाई से उन्हें टोकते हुए कहा कि ‘मैं आपसे कुछ भी सुनना नहीं चाहती। मुझे आप के अमेरिका समर्थक दृष्टिकोण के बारे में पता है।’

इस पर बुजुर्ग गगन बिहारी ने अपने को अत्यधिक अपमानित महसूस किया। कृश्नचंदर और अब्बास की बातों पर तो उन्होंने कोई ध्यान ही नहीं दिया। मशहूर काॅलम लेखक और फिल्म निर्माता अब्बास ने भी मेहता की तरह ही महसूस किया।

 

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