राम मंदिर पर शिया वक्फ बोर्ड ने कहा- अयोध्या नहीं, लखनऊ में बने मस्जिद

लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर शिया वक्फ बोर्ड एक और नया मसौदा लेकर सामने आया है। सोमवार को अखाड़ा परिषद के अध्य्क्ष महंत नरेंद्र गिरी व शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी मसौदे की जानकारी दी।

इस मौके पर शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा कि बाबर के नाम से मस्जिद अयोध्या या फैजाबाद में नहीं बनाई जाएगी, बल्कि लखनऊ के हुसैनाबाद में नजूल की ज़मीन पर मस्जिद-ए-अमन का निर्माण हो। इसके लिए सरकार को एक पत्र लिखकर जमीन दिए जाने की मांग की जाएगी।

पांच सूत्रीय प्रस्ताव में शिया वक्फ बोर्ड ने अयोध्या के विवादित धर्मस्थल से अपना दावा वापस लेते हुए वहां राम का भव्य मंदिर बनाने की याचना की है।

शिया वक्फ बोर्ड द्वारा उच्चतम न्यायालय में पेश किये गये प्रस्ताव में श्री रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास, न्यास के सदस्य और पूर्व अध्यक्ष परमहंस रामचन्द्रदास के उत्तराधिकारी दिगम्बर अखाड़ा के महंत सुरेशदास, पूर्व सांसद और न्यास के सदस्य डा़ रामविलासदास वेदान्ती, पक्षकार महंत धर्मदास और अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि के भी हस्ताक्षर हैं।

प्रस्ताव में कहा गया है कि अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद स्थल पर हिन्दू समाज का कहना है कि वहां राम मंदिर था। वह उनकी आस्था का केन्द्र है। इसका सम्मान करते हुए उत्तर प्रदेश शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड विवादित स्थल से राष्ट्रहित में विवाद को समाप्त करने के लिये बोर्ड अपना अधिकार सम्पूर्ण भूमि पर छोड़ने को तैयार है।

समझौते के रुप में तैयार मसौदे (प्रस्ताव) में कहा गया है कि हिन्दू समाज को अधिकार होगा कि विवादित स्थल पर अपनी आस्था के अनुरुप भव्य मंदिर का निमार्ण करे। इसमें शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को कोई आपत्ति नहीं होगी। प्रस्ताव में स्वीकार किया गया है कि अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद का अस्तित्व अब खत्म हो गया है।

बोर्ड द्वारा पेश किये गये प्रस्ताव में कहा गया है ‘ बोर्ड मानता है कि इस मसौदे से हिन्दू और मुसलमानों के बीच आपसी सदभाव बना रहेगा। इससे अवध की गंगा-जमुनी तहजीब बहाल रहेगी। मंदिर-मस्जिद का विवाद समाप्त करने की दृष्टि से अयोध्या से संबंधित धार्मिक परिक्रमाओं की सीमा से बाहर लखनऊ के हुसैनाबाद स्थित घण्टाघर के सामने खाली पड़ी नजूल की भूमि में से एक एकड़ जमीन शिया समाज को राज्य सरकार आवंटित कर दे।

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