भारत के दलवीर भंडारी एक बार फिर बने इंटरनेशनल कोर्ट में जज

वाशिंग्टन। सुप्रीम कोर्ट में जज रहे दलवीर भंडारी अंतरराष्ट्रीय अदालत के जज बन गए हैं। अंतरराष्ट्रीय अदालत के जजों के पैनल में नए सदस्य के लिए संयुक्त राष्ट्र में सोमवार रात वोटिंग हुई। जिसमें भंडारी ने ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड को हराया।

 संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने पांच सीटों में चार के लिए जजों की नियुक्ति कर ली थी। पांचवीं सीट के लिए भारत और ब्रिटेन के उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर हुई। फैसला सोमवार को एक वोटिंग के जरिए हुआ। भंडारी की स्थिति इसमें लगातार मजबूत बनी रही।

अंतरराष्ट्रीय अदालत में जज बनने के लिए उम्मीदवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद, दोनों में बहुमत हासिल करने की ज़रूरत होती है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुए चुनाव में उन्हें महासभा में 193 में 183 वोट मिले। जबकि सुरक्षा परिषद में 15 वोट।

जस्टिस भंडारी को 193 संयुक्त राष्ट्र सदस्यों में करीब दो तिहाई का समर्थन हासिल था। क्रिस्टोफर ग्रीनवुड, जो आईसीजे में एक कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, महासभा में 50 से अधिक वोटों से पीछे चल रहे थे। हालांकि सुरक्षा परिषद में भंडारी के पांच वोटों के मुकाबले ग्रीनवुड नौ वोटों से आगे रहे।

भंडारी को मिला दूसरा कार्यकाल

भारत के 70 वर्षीय जस्टिस भंडारी को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ये दूसरा कार्यकाल मिला है। इससे पहले वह अप्रैल 2012 में नियुक्त किए गए थे। उस वक्त 193 सदस्यों वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा में उन्हें 122 वोट मिले थे। जबकि फिलिपींस के उम्मीदवार को महज़ 58 वोट मिल पाए थे। जबकि 15 सदस्यों वाले सुरक्षा परिषद में उन्हें पूर्ण बहुमत हासिल हुआ था।

उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2018 में समाप्त होगा। अब वह अगले नौ सालों के लिए दोबारा नियुक्त किए गए हैं।

आईसीजे में अपने कार्यकाल के दौरान भंडारी ने 11 मामलों में अपना व्यक्तिगत निर्णय दिया। जिसमें समुद्री विवाद, अंटार्कटिका में व्हेल पकड़ने, नरसंहार के अपराध, परमाणु निरस्त्रीकरण, आतंकवाद के वित्तपोषण और सार्वभौमिक अधिकारों का उल्लंघन शामिल हैं।

भारतीय अदालतों में 20 साल रहे जज

आईसीजे से जुड़ने के पहले भंडारी भारत की अदालतों में 20 सालों तक जज रहे हैं। वो सुप्रीम कोर्ट में भी वरिष्ठ जज के तौर पर अपनी सेवा दे चुके हैं। भंडारी ने अपनी वकालत की पढाई जोधपुर से की है। उन्होंने अपना करियर एक वकील के रूप में शुरू किया। फिर वह न्यायिक सेवा में चले गए।

कैसे बनते हैं आईसीजे में जज

आईसीजे में 15 जज होते हैं जिन्हें नौ सालों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद नियुक्त करती है। किसी भी उम्मीदवार की नियुक्ति के लिए दोनों संस्थानों में बहुमत मिलना जरूरी है।

आईसीजे के वेबसाइट के मुताबिक, जजों की नियुक्ति उच्च नैतिक चरित्र, योग्यता या अंतराराष्ट्रीय कानून में क्षमता की पहचान रखने वाले वकील की ही हो सकती है। जजों की नियुक्ति उनकी राष्ट्रीयता नहीं बल्कि योग्यता के बल पर की जाती है, लेकिन दो जज एक ही देश से नहीं हो सकते हैं।

1945 में स्थापित आईसीजे दुनियाभर के देशों के बीच कानूनी विवादों को सुलझाता है और कानूनी सवालों पर संयुक्त राष्ट्र के दूसरे संगठनों के नियमों के मुताबिक सलाह देता है। अंतराष्ट्रीय अदालत के दरवाजे उन सभी देशों के लिए खुले हैं,

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