बहन जी पर अमित शाह का यह जाल

नई दिल्ली। लालू के परिवार पर पड़े केंद्रीय एजेसियों के छापों के बाद बिहार में पैदा हुए संकट के तार उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए हैं। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद मायावती का कार्यकाल अगले साल अप्रैल में खत्म हो रहा है।

यूपी विधानसभा में बसपा की इतनी हैसियत नहीं है कि वह अपने दम पर मायावती को रा’यसभा में भेज सके। बसपा के पास यूपी विधासभा में महज 19 सदस्य हैं जो मायावती को राज्यसभा में भेजने के लिए काफी नहीं है।

विपक्ष में सेक्यूलर वोटों के झंडाबरदार बने लालू प्रसाद यादव किसी भी तरीके से मायावती को राज्यसभा पहुंचाने के पक्ष में हैं। माना जा रहा है कि यदि जरूरत हुई तो वह माया को राजद के कोटे से भी राज्यसभा भेज सकते हैं। लालू के पास मायावती को राज्यसभा भेजने का दूसरा विकल्प सपा का सर्मथन दिलाना है।

हालांकि ये लगभग नामुमकिंन है लेकिन लालू अपने समधी मुलायाम के साथ बातचीत कर मोदो को रोकने के लिए ये चाल भी चल सकते हैं। लालू की इस मंशा को भांप कर ही अमित शाह ने सपा में टूट डालने का प्लान तैयार कर लिया है। शिवपाल सिंह यादव का हाल ही में भाजपा प्रेम जागना इसका जीता जागता उदाहरण है।

यदि सपा टूटती है तो भाजपा को इसका दुगना फायदा होगा। 2019 में भाजपा के सामने मजबूत सपा नहीं रहेगी और न ही बसपा उतनी सक्रियता से राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभा सकेगी जितनी मायावती के संसद में बरकरार रहने पर निभाने की संभावना है।

यूपी में खाली होंगी राज्यसभा की 10 सीटें
अगले साल अप्रैल के पहले हफ्ते उत्तर प्रदेश मे रा’यसभा की 10 सीटें खाली हो जाएंगी। इनमें से अधिकतर सीटें सपा या बसपा के कोटे की हैं लेकिन विधाससभा की मौजूदा स्थिति के हिसाब से बसपा के हाथ एक सीट भी आती हुई नजर नहीं आ रही।

यदि सपा एक जुट रही तो उसे दो सीटें मिल सकती है। जबकि 8 सीटों पर भाजपा की जीत तय है। क्योंकि भाजपा के पास 40& सीटों वाली विधानसभा में &08 विधायक हैं। इसके इलावा भाजपा के सहयोंगियों के पास 20 सीटें है।

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