मानव ज्ञान को सम्पूर्ण मानवता के कल्याण में उपयोग करने का संकल्प लें बाल गणितज्ञ : दिनेश शर्मा

इण्टरनेशनल यंग मैथमेटिशियन कन्वेन्शन ‘आईवाईएमसी-2018’ का हुआ भव्य उद्घाटन

लखनऊ : सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर (प्रथम कैम्पस) द्वारा आयोजित चार दिवसीय इण्टरनेशनल यंग मैथमेटिशियन कन्वेन्शन (आई.वाई.एम.सी.-2018) का भव्य उद्घाटन आज सी.एम.एस. गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर सी.एम.एस. छात्रों ने देश-विदेश से पधारे प्रतिभागी छात्रों व विशेषज्ञों के सम्मान में शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों का अनूठा समाँ बाँधा, तो वहीं दूसरी ओर प्रख्यात गणित विशेषज्ञों फिलीपीन्स से पधारे डा. सिमोन एल चुआ, ताईवान से पधारे प्रो. वेन सीन सन एवं अमेरिका से पधारे श्री मार्क सॉल की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा में चार-चांद लगा दिये। सी.एम.एस. गोमती नगर (प्रथम कैम्पस) द्वारा आई.वाई.एम.सी.-2018 का आयोजन 2 से 5 दिसम्बर तक सी.एम.एस. कानपुर रोड ऑडिटोरियम में किया जा रहा है, जिसमें विश्व के 16 देशों बांग्लादेश, ब्राजील, भूटान, इण्डोनेशिया, नेपाल, फिलीपीन्स, रूस, ताईवान, थाईलैण्ड, यू.ए.ई., अमेरिका, ईरान, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका, वियतनाम एवं भारत के विभिन्न प्रान्तों के लगभग 700 बाल गणितज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं।

उद्घाटन समारोह में बोलते हुए मुख्य अतिथि डा. दिनेश शर्मा, उप-मुख्यमंत्री, उ.प्र., ने कहा कि विश्व के बाल गणितज्ञों को एक मंच पर एकत्रित करने का सी.एम.एस. गोमती नगर का प्रयास अत्यन्त सराहनीय है। इस आयोजन ने युवाओं को स्वर्णिम अवसर प्रदान किया है कि सब मिलकर मानव ज्ञान को सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए उपयोग करने का संकल्प लें। उन्होंने आगे कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम हमारा सदैव आदर्श रहा है और यह आयोजन इसी महान विचारधारा का प्रतीक है। इससे पहले, ‘आई.वाई.एम.सी.-2018’ में प्रतिभाग हेतु पधारे छात्र व गणित विशेषज्ञ आज अपरान्हः सत्र में आयोजित एक प्रेस कान्फ्रेन्स में पत्रकारों से मिले और दिल खोलकर अपने विचार रखे। प्रेस कान्फ्रेन्स में पत्रकारों से बातचीत करते हुए फिलीपीन्स से पधारे लेखक एवं शिक्षाविद् डा. साइमन एल चुआ ने कहा कि कम्प्यूटर, विज्ञान व अन्य सभी विषयों की आधारशिला गणित ही है। यदि गणित का विकास न हुआ होता तो वर्तमान में हम जो वैज्ञानिक प्रगति देख रहे हैं वह सिर्फ कल्पना होती वास्तविकता नही। वास्तव में आज की वैज्ञानिक प्रगति का श्रेय भी गणित विषय को जाता हैं। इसी प्रकार प्रो. वेन सीन सन, प्रेसीडेन्ट, चिव चैंग मैथमेटिक्स एजूकेशन फाउण्डेशन, ताईवान ने कहा कि वास्तव में गणित ही सभी विषयों की जननी है।

प्रेस कान्फ्रेन्स में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्कॉलिस्टिका स्कूल, बांग्लादेश से पधारे छात्रों ने कहा कि वे गणित प्रतियोगिताओं में अपने ज्ञान का प्रदर्शन तो करेंगे ही, साथ ही विभिन्न देशों के छात्रों से दोस्ती करने का अवसर भी मिलेगा। दक्षिण अफ्रीका से पधारे छात्रों ने कहा कि हमारा उद्देश्य इन प्रतियोगिताआंे में जीतने का तो है पर उससे भी अधिक है भारतीय संस्कृति की अनेकता में एकता से सीख लेने का। फिलीपीन्स से पधारे छात्रों ने कहा कि गणित तथा विज्ञान ने पूरी दुनियॉ को एक दूसरे के निकट लाकर खड़ा कर दिया है और पूरी दुनियॉ सिमट कर एक गांव के रूप में विकसित हो गई है। इसी प्रकार पी.ओ.सी. एजूकेशन नेटवर्क, ब्राजील से पधारे छात्रों ने कहा कि हमें अपने ज्ञान का उपयोग मानवता की भलाई के लिये करना चाहिए न कि उसके विनाश के लिए। थाईलैण्ड से पधारे छात्रों का कहना था कि सारे विश्व की एक व्यवस्था बनाकर ही मानवता का विकास किया जा सकता है। इसी प्रकार देश-विदेश से पधारे छात्रों ने जोर देकर कहा कि हम संसार के सभी बाल वैज्ञानिकों से अपील करते हैं कि वह विज्ञान तथा गणित का उपयोग मानवता की भलाई के लिए करने का संकल्प लें।

आई.वाई.एम.सी.-2018 की संयोजिका एवं सी.एम.एस. गोमती नगर (प्रथम कैम्पस) की प्रधानाचार्या आभा अनन्त ने कहा कि गणित केवल गणना और अंको का खेल नहीं है अपितु यह मानव मस्तिष्क की गहराइयों तक पहुँचता है। इससे छात्रों की तार्किक और बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। आई.वाई.एम.सी. की प्रतियोगिताएं इस प्रकार आयोजित की गई हैं जिससे देश-विदेश से पधारे बाल गणितज्ञों को एक अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी योग्यता को परखने का अवसर प्राप्त हो, साथ ही साथ उनमें भाईचारा, मैत्री, एकता व सौहार्द की भावना भी विकसित हो।  सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य भावी पीढ़ी को मात्र एक कुशल गणितज्ञ बनाना ही नहीं है अपितु इसके माध्यम से भावी पीढ़ी को अच्छे बुरे की पहचान करने वाला एक संवेदनशील विश्व नागरिक बनाना है। उन्होंने कहा कि गणित विषय मानव जाति की एकता का जितना प्रभावशाली माध्यम है उतना शायद और कोई विषय नहीं क्योंकि गणित एक ऐसा विषय है जो किसी भेदभाव, ऊँचनीच को नहीं मानता। अच्छे कार्य के नतीजे भी अच्छे ही होंगे, यही जीवन का गणित है।

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