नरुहितो होंगे जापान के नए सम्राट, होगी नए युग की शुरुआत

टोकियो : जापान के 85 वर्षीय सम्राट अकितो तीन दशक की राजशाही के बाद मंगलवार शाम को पदमुक्त हो रहे हैं। उनके स्थान पर उनके बड़े बेटे 59 वर्षीय नरुहितो बुधवार को सम्राट बनेंगे और इसके साथ नए युग ‘रीवा’ अर्थात सुंदर और मधुर संयोजन का सूत्रपात हो जाएगा। सम्राट अकितो का ‘हेसे’ युग 8 जनवरी 1989 से शुरू हुआ था। टोकियो स्थित राजमहल ‘अकास्का’ के जिस विशिष्ट कक्ष ‘मात्सु नो मा’ में सम्राट अकितो अपने बड़े बेटे नरुहितो को परम्परानुसार ताज, तलवार और मोहर भेंट करेंगे, उस कक्ष में विशिष्ट व्यक्ति तो होंगे, लेकिन 21वीं सदी के नए सम्राट की अर्धांगिनी मसाको को जापानी परंपरानुसार मौजूद रहने की छूट नहीं होगी। हां, इससे पूर्व एक अन्य समारोह में 300 विशिष्ट अतिथियों, सांसदों, मंत्रिमंडल के सदस्यों और न्यायपालिका के जजों के सम्मुख सम्राट अकितो जब पद त्याग की विधिवत घोषणा करेंगे, उस मौके पर नए सम्राट नरुहितो की पत्नी मसाको भी होंगी और टीवी पर सीधा प्रसारण किया जाएगा।

सम्राट अकितो के पिता हिरोहितो का जनता में बड़ा सम्मान था। जापानी सेना ने द्वितीय विश्व युद्ध में हिरोहितो के नाम पर युद्ध में भाग लिया और पराजय के बाद भी उनकी गौरव गाथाओं की चर्चा होती रही है। नरुहितो के उपरांत ताजपोशी के वास्तविक अधिकारी उनके चाचा 83 वर्षीय प्रिंस हिताची, दूसरे नंबर पर उनके छोटे भाई आकाशिनो और फिर तीसरे नंबर पर छोटे भाई के पुत्र 12 वर्षीय प्रिंस दिशाहितो होंगे। जापानी परंपराओं में नरुहितो की एक मात्र बेटी असुको का कोई पद सुरक्षित नहीं है। न्यू यॉर्क टाइम्स के अनुसार इस समारोह में प्रधानमंत्री शिंज़े एबे मंत्रिमंडल में एक मात्र महिला मंत्री को समारोह में भाग लेने की छूट है। पिछले 200 साल में अकितो पहले सम्राट हैं जो पद त्याग कर रहे हैं।

अकितो ने सन 2016 में बढ़ती उम्र और गुर्दे के आपरेशन तथा कैंसर रोग के कारण बिगड़ते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पद त्याग किए जाने की मंशा व्यक्त की थी। सम्राट जापान के सांवैधानिक मुखिया हैं पर राज्य की सारी शक्तियां विधायिका और इसके सर्वमान्य प्रधानमंत्री के पास है। सम्राट अकितो के पद त्याग की इच्छा के पश्चात संसद ने बाक़ायदा एक विधेयक पारित कर उन्हें एक मई, 2019, तिथि मंगलवार की शाम अधिकृत तौर पर पद त्याग किए जाने का कार्यक्रम निर्धारित किया। सम्राट अकितो और महारानी मिचिको राजमहल छोड़कर टोगु महल में रहने चले जाएंगे। अकितो को सम्मान सूचक ‘जोको’ और मिचिको को ‘जोकागो’ नाम से पुकारा जा सकेगा।

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