अमेरिका की ड्रेक्सल यूनिवर्सिटी द्वारा सी.एम.एस. छात्र को 1,41,600 अमेरिकी डालर की स्कॉलरशिप

लखनऊ, 9 जुलाई। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर (प्रथम कैम्पस) के मेधावी छात्र शिवांश तिवारी ने अमेरिका की प्रतिष्ठित ड्रेक्सल यूनिवर्सिटी द्वारा 1,41,600 अमेरिकी डालर की स्कॉलरशिप अर्जित कर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया है। शिवांश को यह स्कॉलरशिप चार वर्षीय उच्चशिक्षा अवधि के दौरान प्रदान की जायेगी। इसके अलावा, इलिनोईस इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा भी शिवांश को 1,20,000 अमेरिकी डालर की स्कॉलरशिप  से नवाजा गया है, साथ ही साथ, अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी, यूनिवर्सिटी ऑफ कन्सास, मिसॉउरी यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना एवं क्लार्कसन यूनिवर्सिटी ने भी शिवांश को उच्चशिक्षा का आमन्त्रण दिया है। इस प्रकार, सी.एम.एस. के इस होनहार छात्र ने अपनी लगन, प्रतिभा व शैक्षणिक उत्कृष्टता के दम पर अमेरिका के सात विश्वविद्यालयों में चयनित होकर विद्यालय का गौरव बढ़ाया है। सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने इस प्रतिभाशाली छात्र की उपलब्धि पर हार्दिक बधाईयां प्रेषित करते हुए कहा है कि बड़ी संख्या में सी.एम.एस. छात्र विदेशों के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में स्कॉलरशिप के साथ उच्चस्तरीय शिक्षा हेतु चयनित हो रहे हैं, जो कि विद्यालय के लिए गर्व की बात है।

सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने बताया कि इस वर्ष अभी तक सी.एम.एस. के 80 छात्र अमेरिका, इंग्लैण्ड, कैनडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर, जर्मनी आदि विभिन्न देशों के ख्यातिप्राप्त विश्वविद्यालयों में चयनित हो चुके हैं, जिनमें से अधिकतर को स्कॉलरशिप प्राप्त हुई है। श्री शर्मा ने आगे कहा कि सी.एम.एस. छात्रों के दृष्टिकोण व्यापक बनाने व उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने हेतु सदैव प्रयासरत है और इसी कड़ी में छात्रों को भारत में एवं विदेशों में उच्चशिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान कर रहा है। सी.एम.एस. प्रदेश में एकमात्र एस.ए.टी. (सैट) एवं एडवान्स प्लेसमेन्ट (ए.पी.) टेस्ट सेन्टर है जो उत्तर प्रदेश एवं आसपास के अन्य राज्यों के छात्रों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में स्कॉलरशिप के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद कर रहा है। इससे पहले, विदेश में उच्चशिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक प्रदेश के छात्रों को सैट परीक्षा के लिए दिल्ली जाना पड़ता था।

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