बच्चों को दूध पिलाना मां को कैंसर से बचाता है : CMO

बाराबंकी । बच्चों की बेहतर सेहत के लिए स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) बहुत जरूरी है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं में कैंसर का खतरा कम होता है। इतना ही नहीं, मोटापे की भी समस्या नहीं आती। नवजात को स्तनपान नहीं कराने से महिलाओं का दूध बाहर नहीं निकल पाता है। ऐसे में दूध अंदर जम कर गांठ बन जाता है। यह गांठ बाद में घाव का रूप धारण कर लेता है और अंत में यह कैंसर का रूप ले सकता है। उक्त बाते अध्यक्षता कर रहे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश चन्द्र ने आरसीएचहाल में विश्व स्तन पान सप्ताह पर आयोजित कार्यशाला में कही।

सीएमओ ने बताया दो वर्षों तक स्तनपान करने वाले बच्चे कम बीमार पड़ते हैं। क्योकि स्तनपान करने से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और छोटी मोटी बीमारियां जैसे जुकाम और खांसी ऐसे बच्चों को नहीं होती। इसके अलावा स्तनपान करने वाले बच्चों को सांस की बीमारी और निमोनिया होने का खतरा भी काफी कम हो जाता है। बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास में  स्तनपान बड़े मायने रखता है। उन्होंने कहा छह माह तक केवल स्तनपान से ही बच्चे की खुराक पूरी हो जाती है। छह माह का होने पर ही बच्चे को संपूरक आहार देना प्रारंभ करें।

उन्होंने आगे बताया कि 1 से 8 अगस्त तक चल रहे विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन  कार्यक्रम के आयोजन करने के लिए हर ब्लॉक को 5000 रुपये की राशि आवंटित की गई है। नेशनल हेल्थ मिशन की ओर से इस प्रकार के आयोजनों के लिए जिला स्तर पर 4000 रुपये आवंटित किए गए हैं। विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य विभाग रैलियों और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए माता-पिता को स्तनपान के लिए प्रति जागरूक करेगा।

कार्यशाला के दौरान विभाग के नोडल अधिकारी समेंत कई अन्य अधिकारियों ने विश्व स्तनपान सप्ताह पर अपनी बात रखतें हुए विस्तार से जानकारी दिया। तथा कार्यक्रम को सफल बनाने  के लिए लोगों से  आगे आने की अपील की।

प्रदेश में क्या है स्तनपान की दर

एनएफएचएस – 4 के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्ष 2015-2016 में संस्थागत प्रसव का दर 68 प्रतिशत है। शिशु के स्वास्थ्य के द्रष्टिगत एक घंटे के अंदर स्तनपान आरम्भ किया जाना चाहिये किन्तु प्रदेश में एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान कराने की दर 25 प्रतिशत है , वहीं राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के आंकड़ों पर गौर करें तो बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध सूबे में मात्र 39 प्रतिशत बच्चों को ही नसीब होता है। जन्म से लेकर छह मां तक मां का दूध पीने वाले बच्चों का प्रतिशत 35.4 है । हर दूसरा बच्चा पहले दूध से वंचित – सूबे में जन्म लेने वाला हर दूसरा बच्चा मां के पहले दूध से वंचित है। सिर्फ 53.8 फीसदी बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें जन्म के बाद मां का दूध मिल पा रहा है।

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