आंगनवाड़ी केन्द्रों पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की महिलाओं की गोदभराई

बाराबंकी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल आज एक दिवसीय दौरे के तहत बाराबंकी आई । उन्होंने मसौली व बड़ागांव  ब्लाक के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पहुंचकर 4 गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार भेटकर गोदभराई की रस्म अदा की और केन्द्रों पर गर्भवती एवं धात्री महिलाओं से समय से विभिन्न जांचे कराने एवं उचित खान-पान को लेकर सावधानी बरतने की अपील की। वहीं छोटे बच्चों से एमडीएम के बारे में बातचीत कर जानकारी ली। साथ ही वहां केन्द्र पर बने केक को खाकर उसका स्वाद भी लिया। स्थानीय जनपद के 2842 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर गोदभराई समारोह का आयोजन किया गया ।

 उक्त जानकारी देते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रकाश कुमार चौरसिया ने बताया कि जनपद के 2842 आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोदभराई दिवस कार्यक्रम के रूप में मनाया गया। उन्होंने बताया राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मसौली व बड़ागांव  ब्लाक के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर संजू, निशा, आरती, उषा को पौष्टिक आहर भेट कर गोदभराई की रस्म अदा की। साथ ही केन्द्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को मेडसिन किट देकर पोषण विकास कार्यक्रम के तहत चल रहीं विभिन्न योजना के बारे में जानकारी ली। वहीं केन्द्र प्रांगण में वृक्षारोपण करते लोगों से पेड़ ज्यादा से ज्यादा लगाने की अपील की । उन्होंने बताया आंगनबाड़ी केंद्र पर मिलने वाले पौष्टिक आहार के बारे में राज्यपाल ने लाभार्थियों को बताया पुष्टाहार से गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चों को पोषकतत्व प्रदान कर उनको कुपोषण से बचाया जा सकता है। संतुलित खानपान और पोषाहार से बच्चों के शारीरिक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है एवं पूरक तत्वों की कमी को दूर किया जा सकता है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने आगे बताया कि जनपद के विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों पर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समय से जांच कराने, आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करने, आयरन की गोली का नियमित प्रयोग करने, प्रसव के एक घंटे के अन्दर पीला गाढ़ा दूध नवजात को पिलाय जाने, प्रसव सिर्फ संस्थागत कराने की सलाह दी गई। इसके साथ ही चतुरंगी आहार में लाल, हरा, पीला, सफेद चार तरीके के भोजन करने की सलाह दी गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा केंन्द्र पर उपस्थित महिलाओं एवं किशोरियों को साफ-सफाई के बारे में बताया कि आप लोग अपने घर के आसपास साफ-सफाई का माहौल रखें और कहीं भी पानी इकठ्ठा न होने दें क्योंकि रुके हुये पानी में मच्छर के पनपने का डर रहता है। इस वजह से वहां बिमारियां  पनपती है।

केन्द्रों पर मौजूद गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को प्रसव के पूर्व की तैयारी और प्रसव पश्चात की तैयारी के विषय में भी जानकारी दी गई। इसके अलावा  टीकाकरण, परिवार नियोजन, संस्थागत और सुरक्षित प्रसव के विषय में भी बताया। पोषण के अन्तर्गत हरी सब्जी, दूध, फल का सेवन, स्वास्थ्य के अन्तर्गत नियमित टीकाकरण, आयरन की गोली, प्रसव पूर्व जाँच के बारे में विभिन्न  जानकारी दी गई। सभी महिलाओं को जन्म से लेकर छः माह तक शिशुओं को सिर्फ स्तनपान ही कराने और अन्य किसी भी प्रकार के तरल पदार्थ न खाने के लिए परामर्श दिया गया।

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