पल्स पोलियो अभियान : डोर टू डोर बच्चों को पिलाई गई दो बूंद जिंदगी की

बाराबंकी । भारत को पोलियो से मुक्त कराने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से सघन पल्स पोलियो अभियान पिछले कई सालों से चलाया जा रहा है, ताकि अब कोई भी बच्चा पोलियो ग्रस्त न हो। इसको लेकर एक बार फिर 15 से 20 सितंबर तक पल्स पोलियो अभियान चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डोर टू डोर पांच वर्ष तक के करीब 2 लाख 85 हजार बच्चों को दवा पिलाई। इस कार्यक्रम की शुरुआत रविवार को जिला अधिकारी डॉक्टर आदर्श सिंह ने जिला महिला अस्पताल में बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाकर की थी।

यह जानकारी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी व कार्यक्रम के  नोडल अधिकारी डा राजीव कुमार ने  दी । पल्स पोलियो अभियान के दूसरे दिन सोमवार को स्वास्थ्य विभाग, आशा, ऐनम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं समेंत अन्य ने स्थायी बूथों पर दवा पीने से वंचित रहने वाले बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो रोधक दवा पिलाई। इस दौरान अभियान से जुड़े कर्मियों ने स्कूलों, स्लम एरिया व अन्य जगहों पर भी जाकर छूटे बच्चों को पोलियों की दवा पिलाई। साथ ही जिस भी बच्चे को अभिभावकों की ओर से रविवार के दिन दवा नहीं पिलाई गई थी उन्हें उनके घर जाकर ही दवा पिलाई जा रहीं है। यही नहीं, हर मकान, प्रतिष्ठान पर नंबर भी अंकित किए जा रहें है।

उन्होने आगे बताया अभियान के तहत जिले में 5 वर्ष तक के बच्चों को शत प्रतिशत रूप से पोलियो खुराक पिलाये जाने के उद्देशय से डोर टू डोर कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। सोमवार से लक्ष्य हासिल करने के लिए 4 हजार 4 सौ 55 वर्करों द्वारा गांव – गांव डोर टू डोर  पहुंचकर दवा पिलाई जा रही है ।पल्स पोलियो अभियान में जहां कार्यक्रम की शुरुआत किया गया वही कोई भी बच्चा कुपोषित ना हो इसको लेकर पोषण माह के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियो ने भी अपने पोषाहार से संबंधित स्टाल लगाया और पोलियो की खुराक पीने वाले बच्चों में पोषाहार का वितरण किया।

उन्होंने बताया कि अभियान के शुरूआती दौर में बूथ पर पोलियो की दवा बच्चों को पिलाई गई । इसके बाद घर-घर जाकर बच्चों का तलाश किया जा रहा है । पोलियो की अतिरिक्त खुराक पाने से कोई भी बच्चा वंचित न रह जाए, इसके लिए बच्चों को दो बूंद जिंदगी की पोलियो की डोज देकर जल्द लक्ष्य पूरा करने का काम किया जा रहा है ।

नोडल अधिकारी डा गौड़ ने बताया पोलियों अभियान को सफल बनाने के लिए जनपद में 1485 बूथ बनाए गए हैं, जहाँ पर 0 से 5 वर्ष तक के लगभग 5 लाख 64  हजार 2 सौ 22 बच्चों को पोलियो कि दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । बूथ पर्यवेक्षक 345, कुल टीम पर्यबेक्षकों की संख्या 342, कुल ट्रांजिट टीमों की संख्या 104, जिसमें से 93 गांव में व 11 नगर में सक्रिय है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डा रमेश चंद्र ने ने बताया –

पोलियो या पोलियोमेलाइटिस एक गंभीर और खतरनाक बीमारी है। पोलियो वायरस से होता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। साथ ही यह वायरस जिस भी व्यक्ति में प्रवेश करता है उसके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है जिसकी वजह से लकवा भी हो सकता है।उन्होंने जिलेवासियों से अपील की है कि शून्य माह से लेकर पांच वर्ष तक आयु के बच्चों को पोलियो की अतिरिक्त खुराक जरुर पिलाएं।

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