अब आरबीएसके टीम कुष्ठ एवं टीबी रोग का भी कराएंगी इलाज

बाराबंकी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत काम करने वाली जनपद की 30 मेडिकल टीम अब 44 प्रकार की बीमारियों की स्क्रिनिंग कर बाल मरीजों का इलाज कराएंगी। टीबी और कुष्ठ रोग समेत 6 नयी बीमारियों को ढूंढने और इलाज करवाने के लिए टीम के सभी सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया। वर्ष 2025 तक टीबी को भारत में जड़ से समाप्त करने की दिशा में यह एक बहुत ही महात्वपूर्ण निर्णय है।

अपर मुख्य चिकित्साधिकारी व आरबीएसके नोडल डा डीके श्रीवास्तव ने  बताया  पहले टीम के सदस्यों के द्वारा कुल 38 प्रकार के रोगों को देखा जाता था। लेकिन अब टीबी और कुष्ठ रोग के लक्षणों की भी पहचान बच्चों के अन्दर की जाएगी। टीबी को भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया है। यह एक संक्रामक रोग है और संक्रमण के द्वारा फैलता है। वहीं कुष्ठ रोग भी संक्रमण के जरिए फैलता है। इसलिए इसपर विशेष ध्यान देने के निर्देश मिले हैं। जिले के सभी 15 ब्लाकों में 30 टीमें काम कर रही हैं। इन टीमों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे इन रोगों की भी जांच वे करें। इसके लिए उन्हें जरुरी प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। आगे से जो टीमें स्कूलों में जाएंगी वह इन रोगों की भी जांच करेंगी।

आरबीएसके टीम के 110 सदस्य हुए प्रशिक्षित

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डीईआईसी मैनेजर अवधेश कुमार बताते हैं टीबी और कुष्ठ रोग से पीडि़त बच्चों की पहचान तथा इलाज को लेकर जिले की आरबीएसके टीम के करीब 110 सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है। अब  डा विकास श्रीवास्तव, डा सलमान, डा जावेद खान समेंत अन्य शामिल हैं। उन्होंने बताया योजना से जुड़ी टीम शून्य से 18 वर्ष तक की आयुसीमा के आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में आने वाले बच्चों में इन बीमारियों की स्क्रिनिंग करती हैं और प्रभावित बच्चों का इलाज कराती हैं। टीबी का उन्मूलन भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। टीम को बच्चों की टीबी का पता लगाने के लिए विशेष तौर पर फोकस होकर काम करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि जिले के प्रत्येक ब्लाक में कार्य रही आरबीएसके टीम में दो चिकित्सक, एक स्टाफ नर्स और एक पैरामेडिकल स्टाफ प्रतिदिन किसी स्कूल या आंगनबाड़ी केंद्र पर जाते हैं और वहां मौजूद बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करते हैं।

अभी इन बीमारियों का हो रहा है इलाज

आरबीएसके नोडल अधिकारी ने बताया योजना के तहत न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, डाउन सिंड्रोम, क्लफ्ट लीफ एंड पैलेट (कटा होठ व तालू), क्लब फुट (टेढ़े-मेढ़े पैर), डेवलपमेंट डिस्प्लेजिया आफ हिप, कंजेनाइटल कट्रैक्ट(जन्मजात मोतियाबिंद), कंजेनाइटल डीफनेस (जन्मजात बहरापन), कंजेनाइटल हार्ट डिजीज, रेटिनोपैथी आफ प्रीमेच्योरिटी, एनीमिया, विटामिन ए की कमी, रिकेट्स, अति कुपोषण, घेंघा, चर्म रोग, ओटाइटिस मीडिया (कान बहना), रुमैटिक हार्ट डिजीज, रिएक्टिव एयरवे, डेंटल कंडीशन, कंवर्जन डिसआर्डर, विजन इंपेरिमेंट (आंख से जुड़ी समस्याएं), हियरिंग इंपेरिमेंट (कान से जुड़ी दिक्कतें), न्यूरोमोटर इंपेरिमेंट, मोटर डिले, कांग्नीटिव डिले, स्पीच एंड लैंग्वेज डिले, विहैबियर डिसआर्डर, लर्निंग डिसआर्डर, अटेंशन डिफीसीट हाइपर एक्टिविटी डिसआर्डर, ग्रोइंग अप कंसर्न, सबस्टेंस एब्यूज, फील डिप्रैस्ड, किशोरियों के मासिक धर्म में देरी, मासिक धर्म के दौरान पेशाब में जलन, मासिक धर्म के दौरान दर्द, पानी आना व बच्चों और किशोरों की अन्य बीमारियों को चिन्हित कर उसका इलाज किया जाता है।

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