जैविक खेती के बढ़ावा देने के लिए किसानों को आगे आना होगा: प्रेसीडेंट

50वें स्थापना दिवस पर आयोजित हुई कार्यशाला

लखनऊ । जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एवं मृदा में जैव उर्वरा शक्ति के संरक्षण के लिए  रासायनिक कीटनाशकों एवं उर्वरको  के संतुलित प्रयोग हेतु अब समय रहते ही  सभी किसानों को आगे आने की अत्यंत जरूरतें है। उक्त बातें  ट्रापिकल एग्रो सिस्टम इण्डिया लिमिटड के प्रेसीडेंट जी मोहन कुमार ने 50वें स्थापना दिवस  के अवसर पर ट्रांसपोर्ट नगर लखनऊ के एक होटल में आयोजित कार्यशाला के दौरान कहीं।

उन्होंने बताया जैविक खेती में शुरुआत में कम उत्पादन होता है, क्योंकि मिट्‌टी रासायनिक खाद की आदी रहती है, लेकिन जैविक खाद के लगातार इस्तेमाल में मिट्‌टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती जाती है। इससे उत्पादन भी बढ़ता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्नत किसानों समेंत अन्य किसानों को पौधों के संरक्षण की जानकारी दी।

कंपनी के रीजनल मैनेजर ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए बताया कि कंपनी इस बार उत्तर प्रदेश में 10 हजार किसानों को जैविक खेती  एवं इसके लाभ के बारे में जागरूक करने के लिए लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक विभिन्न जिलों के 6 हजार 500 किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रशिक्षित किया जा चूका है। कार्यशाला के दौरान जैविक पद्धति से उगायी गई सब्जियों एवं पौधा का प्रदर्शन भी किया गया।

कम्पनी के मार्केटिंग कोऑडिनेटर  एस साई ने कहा कि खेतों में जैविक उत्पादों को मृदा के साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। महाप्रबंधक प्रवीन कुमार श्रीवास्तव ने अपने सम्बोधन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये किसानों  एवं उद्वमियों  को जैव कीट प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इस मौके पर रायपुर के रीजनल मैनेजर उमेश चौधरी, लखनऊ के विकास, डा रवीश पाण्डेय, ऐरिया मैनेजर एचएन तिवारी आदि मौजूद रहे।

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