केक काटकर नवजातों का आंगनवाड़ी केंद्रों पर मना जन्मदिवस

बाराबंकी। स्थानीय जनपद के सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों पर गुरुवार को बचपन दिवस मनाया गया। नवजात शिशुओं, उनकी माताओं और गर्भवती महिलाओं को पोषाहार और सफाई की विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान विभिन्न आगनबाड़ी केन्द्रों पर नवजात बच्चों एवं छोटे बच्चों का जन्मदिन तिलक लगाते हुए केक काटकर मनाया गया । केन्द्रों पर उनको पोषाहार वितरण किया गया। हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही साफ सफाई पर विशेष ध्यान देने के लिए जानकारी दी गई।

जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रकाश कुमार चौरसिया ने बताया स्थानीय जनपद के करीब 3 हजार 52 आंगनवाडी केंद्रों पर बचपन  दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया । आंगनबाङी केन्द्रों पर पंजीकृत जिन बच्चों का जन्म नवम्बर माह में हुआ है उन सभी बच्चों का जन्म दिन तिलक लगाते हुए केक काटकर धूमधाम से मनाया गया । साथ ही माताओं को स्तन पान का महत्व और बच्चे के सेहत पर इसके प्रभाव की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर बच्चों को ठंडी से बचाने के बारे में जानकारी देते हुए उनके खानपान के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों को और उनके माता व परिवार के लोगों को हाथ धुलने की विधि के बारे में हैंडवास कराकर बताया गया। मौके पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों की मां से खुद को और अपने बच्चों को स्वस्थ्य व बिमारियों से दूर रहने के लिए कुछ खाने- पीने से पहले हाथ धुलने के फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

बाल विकास परियोजना अधिकारी (नगर) निधि सिंह ने बताया आंगनबाड़ी केन्द्रों पर महिलायें अपने बच्चो और परिवार के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चो और महिलाओं को तिलक लगाकर तथा मंगल गीत गाकर की गई। इस दौरान माताओं को खानपान में मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियों के विषय में बताया गया।

उन्होंने बताया जो बच्चे इस माह अपना एक वर्ष पूर्ण कर चुके है उनका इस अवसर पर आगनबाड़ी केंद्र पर बुलाकर उनका जन्मदिन मनाया गया, साथ ही उनकी माताओ को जानकारी देते हुए जन्म के तुरंत बाद शिशु को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध पीने की सलाह दी गई, साथ ही बच्चो को लगातार 6 माह तक केवल स्तनपान कराने से मां और बच्चे में स्नेह और जुडाव बनता है। इस अवसर पर विभिन्न केन्द्रों पर जिन बच्चों का जन्म दिन मनाया गया वे सभी बच्चे अपने-अपने केन्द्र पर पोषाहार से बने केक काटकर खुशियां मनायी।

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