एनीमिया मुक्त भारत अभियान में अब और व्यापक जन जागरूकता

बाराबंकी । एनीमिया मुक्त भारत अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय  समन्वय बैठक का आयोजन डीआरडीए सभागार में किया गया । इस दौरान नोडल अधिकारियों द्वारा कार्य योजना तैयार की गई। इस अभियान के व्यापक प्रचार प्रसार हेतु सभी विभागों से सहयोग की अपेक्षा की गई एवं सभी लोग अपने अपने स्तर से जन-जारूकता का जोरदार अभियान चलाएंगे जिससे एनीमिया मुक्त भारत का सपना पूरा हो सके। इस अवसर पर डीएम डा आदर्श कुमार सिंह ने कहा, एनीमिया से लड़ने के लिए पहले से ही नेशनल आयरन प्लस इनिशिएटिव (निपी), वीकली आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन (विफ़्स) और नेशनल डिवार्मिंग डे (एनडीडी) कार्यक्रम चल रहे हैं लेकिन इन कार्यक्रमों को और अधिक मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गयी है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डा रमेश चन्द्र ने कहा कि जनपद में इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए चिकित्सा विभाग, शिक्षा विभाग तथा आईसीडीएस विभाग का विभिन्न लाभार्थी समूह तक पहुँचने का प्रयास करने और कार्यक्रम का आच्छादन बढ़ाने की अत्यन्त जरूरतें है। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, पंचायती राज समेंत  अन्य विभाग के नोडल अधिकारियों व सीएचसी अधिक्षकों ने अपनी बातें रखी।

एनीमिया से सम्बंधित आंकड़े

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे- 4 2015 -2016 अनुसार नजर डालें तो बाराबंकी में 15 से 49 वर्ष की किशोरियां एवं महिलाओं में एनीमिया का प्रतिशत ग्रामीण स्तर पर 37.3 तथा कुल 38.2 प्रतिशत है। साथ ही 6 से 59 माह के लगभग 43.9 प्रतिशत बच्चे और 15 से 49 वर्ष के लगभग 16.5 प्रतिशत पुरुष खून की कमी से जूझ रहे हैं। इससे निबटना एक बड़ी जिम्मेदारी है। इन सभी आयु वर्गों में एनीमिया में कमी लाने के लिए उपलब्ध आयरन सिरप और गोली के साथ इसके प्रति जागरूकता लाना बहुत जरूरी है। एनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ही 31 मार्च 2020 तक आईईसी (व्यापक प्रचार-प्रसार) अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान गर्भ से लेकर 19 वर्ष तक के किशोर किशोरियों को ध्यान में रखकर उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं एनीमिया मुक्त भारत अभियान के नोडल अधिकारी डॉक्टर महेंद्र कुमार सिंह ने बताया इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में खून की कमी से ग्रसित 6 वर्ष से 19 वर्ष तक के किशोर- किशोरियों और गर्भवती व धात्री माताओं में प्रतिवर्ष 3 प्रतिशत की दर से गिरावट लाना है। डॉ सिंह ने बताया कि मुख्य रूप से पोषक तत्वों की कमी के कारण खून की कमी हो जाती है इसके चलते शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होता है प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आ जाती है।

इस मौके पर अपर उप एवं उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला बेसिकशिक्षा अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा अधिकारी, जिला पंचायत राजअधिकारी सहित  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक मौजूद रहें।

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