Barabanki : डोर टू डोर जाकर खिलाई जाएगी फाइलेरिया की दवा

बाराबंकी । राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में 17 फरवरी से 29 फरवरी तक फाइलेरिया की रोकथाम पर अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत 2 साल से अधिक उम्र के सभी बच्चों और बड़ों को डीईसी व एल्बेण्डाजोल की दवा मुफ्त खिलाई जाएगी। कार्यक्रम में इस बार जिले के करीब 36.67 लाख से अधिक लोगों को दवा खिलाई जायेगी। यह जानकारी फाइलेरिया निरीक्षक केके गुप्ता ने दी।

उन्होंने बताया अभियान में अभियान के तहत इस बार 2 से 5 साल तक के 28.86 हजार, 6 से 14 साल तक के 82.99 हजार, 15 साल से ऊपर के 19.48 हजार समेंत लक्षित कुल जनसंख्या 36 लाख 67 हजार  है। इसको लेकर 36.84 लाख की आबादी को कवर किया जाएगा। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिले की 4080 आशा, एनम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल है। उन्होंने आगे बताया  डीईसी दवा 2-5 वर्ष के बच्चों को एक गोली एवं 15 वर्ष व उससे अधिक को 3 गोली खिलाई जाएगी। यह दवा 02 वर्ष से छोटे बच्चो, गर्भवती महिलाओ, गंभीर रोग से ग्रसित व्यक्तियो एवं अत्यंत वृद्ध व्यक्तियो को  नही खाना है । पेट के कीड़े की दवा एल्बेंडाजाल 2 वर्ष से ऊपर सभी व्यक्ति  को एक गोली खाना है । दवा खाली पेट नही खानी है।

अपर मुख्य चिकित्साअधिकारी व नोडल डा आरसी वर्मा ने बताया कि इस रोग मे बुखार, ठंड के साथ हाथ पैर /अंडकोष /स्तन आदि मे गिल्टिया/सूजन आ जाती हैं शुरुआत मे सूजन अस्थाई होती है परंतु बाद मे स्थाई हो जाती है इसका मुख्य परजीवी वाउचेरिया बैक्राफ्टाई होता है जो मादा क्यूलेक्स प्रजाति के विशेष मच्छरों से संचरित होता है। परजीवी का माइक्रोफाइलेरिया व्यक्ति के रक्त मे होने के बाद भी व्यक्ति  को पता नही चलता कि वह इससे ग्रसित है। उन्होंने बताया फाइलेरिया को समाप्त करने के लिए फाइलेरिया की डीईसी दवा जनसामान्य के आयु को वर्गवार खिलाई जायेगी। इसके साथ ही पेट के कीड़े की दवा एल्बेंडाजाल भी खिलाई जाएगी।

जिला मलेरिया अधिकारी डा अविनाश  कुमार ने बताया फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है, इसके मच्छर अधिकतर गंदगी में पनपते हैं। संक्रमित व्यक्ति को काटकर यह मच्छर संक्रमित हो जाते हैं। इसके बाद यही संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर संक्रमित कर देते हैं। इससे संक्रमित व्यक्तियों को हाथी पाँव व हाइड्रोसिल का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी है कि घर और आस-पास मच्छरों को पनपने न दें, साफ़-सफाई रखें, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, ताकि इस बीमारी की चपेट में आने से बच सकें।

loading...