13 देशों के छात्रों द्वारा नृत्य एवं संगीत का साँस्कृतिक महोत्सव सी.एम.एस. में आज

लखनऊ, 16 जनवरी। सिटी मोन्टेसरी स्कूल की मेजबानी में चल रहे 27वें अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर के प्रतिभागी 13 देशों के छात्र कल 17 जनवरी, शुक्रवार को प्रातः 10.30 बजे से सी.एम.एस. कानपुर रोड आॅडिटोरियम में नृत्य एवं संगीत का साँस्कृतिक महोत्सव ‘ओपेन डे समारोह’ मना रहे हैं। लखनऊ के जिलाधिकारी श्री अभिषेक प्रकाश, आई.ए.एस., इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। इस भव्य समारोह में विभिन्न देशों के बच्चे अपने-अपने देश के लोकनृत्यों व लोकगीतों की अनूठी छटा प्रस्तुत कर लघु विश्व का अद्भुद दृश्य प्रदर्शित करेंगे तथापि एक मंच पर 13 देशों का साँस्कृतिक संगम एकता, शान्ति व सौहार्द से भरपूर विश्व व्यवस्था का अद्भुद दृश्य उपस्थित करेगा। सी.एम.एस. की मेजबानी चल रहे इस अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर में ब्राजील, कैनडा, कोस्टारिका, डेनमार्क, फ्राँस, जर्मनी, इटली, मैक्सिको, नार्वे, स्वीडन, थाईलैण्ड, अमेरिका एवं भारत के 11 से 12 वर्ष की आयु के बाल प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं।

सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने बताया कि सी.एम.एस. की मेजबानी में चल रहे ‘अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर – पीस हैज ए 100 नेम्स विलेज’ में 13 देशों से पधारे 11 से 12 वर्ष आयु के चार-चार बच्चों के दल अपने ग्रुप लीडर के नेतृत्व में आजकल एक माह के लखनऊ प्रवास पर है तथापि इस दौरान भारत की संस्कृति व सभ्यता का परिचय प्राप्त कर रहे हैं। यह अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर 28 दिसम्बर 2019 से 24 जनवरी 2020 तक आयोजित हो रहा है जिसमें विभिन्न देशों से पधारे बाल प्रतिभागी लगभग एक माह तक साथ-साथ रहकर ‘वसुधैव कुटम्बकम’ की भावना को साकार कर रहे हैं।

श्री शर्मा ने बताया कि सी.एम.एस. की मेजबानी में आयोजित यह 27वाँ अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर है। अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर में भाग लेने पधारे बच्चों को ठहरने, खाने-पीने, खेल-कूद, ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण, चिकित्सा आदि की सारी सुविधायें सी.एम.एस. द्वारा उपलब्ध करायी जा रही हैं। नन्हें-मुन्हें बच्चों को एक स्थान पर साथ-साथ इकट्ठे रखे जाने का उद्देश्य विभिन्न संस्कृति, भाषा, सभ्यता, रीति-रिवाज में पले-बढ़े बच्चों के कोमल हृदय में आपसी भाईचारा, विश्व शांति तथा विश्व बन्धुत्व की भावना का समावेश करना है, ताकि विश्वव्यापी दृष्टिकोण से परिपूर्ण ये बच्चे बड़े होकर मानव निर्मित सीमाओं से ऊपर उठकर एक विश्व की परिकल्पना को साकार करने में निश्चित ही सार्थक भूमिका निभाये।

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