ड्रैगन ने अमेरिका को दी खुलेआम धमकी, बोला- अंजाम भुगतना पड़ेगा

बीजिंग। चीन ने ताइवानी राष्ट्रपति को बधाई देने पर अमेरिका को खुलेआम धमकी दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। बता दें कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन को बधाई दी थी। जिस पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता है जबकि ताइवान ने हमेशा इसका विरोध किया है।

ताइवानी राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन की जीत को लेकर अमेरिका के बधाई संदेश पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन को शुभकामना देकर ताइवान-चीन संबंधों और चीन-अमेरिका संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इससे क्षेत्र की शांति को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि हमारा देश इसके खिलाफ गंभीर कदम उठाएगा और अमेरिका को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। बता दें कि चीन और अमेरिका में कोरोना वायरस को लेकर पहले से ही तनाव चरम पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार वैश्विक महामारी को लेकर चीन पर निशाना साध चुके हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद
ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन की राष्ट्रपति चुनाव में दोबारा जीत पर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने शुभकामना देते हुए कहा कि डॉ त्साई इंग-वेन को ताइवान के राष्ट्रपति के रूप में आपके दूसरे कार्यकाल की बधाई। ताइवान का जीवंत लोकतंत्र क्षेत्र और दुनिया के लिए एक प्रेरणा है। राष्ट्रपति त्साई के नेतृत्व में ताइवान के साथ हमारी साझीदारी फलती-फूलती रहेगी।

Secretary Pompeo

@SecPompeo
Congratulations to Dr. Tsai Ing-wen on the commencement of your second-term as Taiwan’s President. Taiwan’s vibrant democracy is an inspiration to the region and the world. With President Tsai at the helm, our partnership with Taiwan will continue to flourish.

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6:08 PM – May 19, 2020

रिकार्ड मतों से जीतीं त्साई इंग-वेन
चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवानी राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने रिकार्ड रेटिंग के साथ अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की है। इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सह अस्तित्व के आधार पर बातचीत की पेशकश भी की है। बता दें कि चीन हमेशा से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान हमेशा से अपने आपको एक अलग देश बताता है।

एक देश-दो सिस्टम के मुद्दे पर बातचीत नहीं
ताइपे में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के मौके पर आयोजित एक परेड के दौरान 63 साल की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने कहा कि वह चीन के साथ बातचीत कर सकती हैं लेकिन एक देश-दो सिस्टम के मुद्दे पर नहीं। त्साई के पहले कार्यकाल के दौरान चीन ने ताइवान से सभी प्रकार के संबंधों को खत्म कर दिया था। इसके अलावा कई बार चीनी सरकार ने ताइवान पर सैन्य कार्यवाई की धमकी भी दी थी।

क्यों है चीन और ताइवान में तनातनी
1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने चियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद चियांग काई शेक ने ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्यूनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है।

ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन
चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी इसके लिए सेना के इस्तेमाल पर भी जोर देती आई है। ताइवान के पास अपनी खुद की सेना भी है। जिसे अमेरिका का समर्थन भी प्राप्त है। हालांकि ताइवान में जबसे डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी सत्ता में आई है तबसे चीन के साथ संबंध खराब हुए हैं।

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