विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर बुजुर्गों के जीवन में उजाला लाने का लें संकल्प!!

                                                  21 अगस्त  विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस  पर विशेष !!

  • संस्था 25 वर्षो से बुजुर्गो के सम्मान व अधिकारों के लिए कर रही  जागरूक
  • कोरोना काल में वितरण किया 1500 मास्क व साबुन

बाराबंकी 20 अगस्त 2020 । विश्व में वृद्धों एवं प्रौढ़ों के साथ होने वाले अन्याय, उपेक्षा और दुर्व्यवहार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 21 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे भिन्न-भिन्न-नामों से जाना जाता है। इस अवसर पर अपने वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करने एवं उनके सम्बन्ध में चिंतन करना आवश्यक होता है। इसकी एक झलक  बाराबंकी में मसौली ब्लॉक के सफदरगंज सरैया में  देखने को मिलती है। जिसमें वरिष्ठ नागरिक दिवस व पितृपक्ष में बुजुर्ग माता-पिता की पूजा पाठ कर संताने आशीर्वाद लेती हैं। यह कार्यक्रम परिजात युवक समित नामक संस्था के तहत  विगत 25 वर्षो से  जिला सहित रायबरेली के कई ब्लाकों में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही कोरोना महामारी के दौरान अब तक  1500 नागरिकों मास्क व साबुन वितरण कर चुकी है। साथ ही कोरोना महामारी से बचने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

संस्थान के महामंत्री जगतजीत सिंह ने बताया विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर बुजुर्गों के जीवन में उजाला लाने के लिए आप सभी को संकल्प लेना होगा।  18 अगस्त 1989 को उक्त संस्थान की स्थापना की गई थी। इसको  लेकर पिछले मंगलवार को एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के लगभग 500  लोगों सहित कोरोना महामारी के शुरूआत से अबतक  1500 से ज्यादा लोगों को  मास्क व साबुन वितिरण किया जा चुका है।  इसके अलावा बर्जुगो के हक व सम्मान के लिए संस्थान  पदाधिकारी  हमेशा सक्रिय एवं प्रयासरत रहते है।  उन्होने बताया संस्थान की ओर से विगत 24 वर्षों से लगातार 32 प्रबंध कार्यकारिणी समिति सदस्यों के साथ 216 आजीवन मेंबरों के द्वारा अपने जीवित माता-पिता की फल, फूल, मिष्ठान व अंग वस्त्र भेंट कर आशीर्वाद लिया जाता है।

पारिजात युवक समिति के संस्थापक राम नरेश रावत ने कहना है कि संस्थान की स्थापना के समय से ही  माता-पिता सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस समय इसकी आवश्यकता इसलिए है क्योंकि परिवार टूटते जा रहे हैं। इस आयोजन की मूलभावना है. श्रृद्धा से श्राद्धए जिसका मतलब है कि हम माता.पिता का श्राद्ध तब करेंगे जब जीवित रहते उनके प्रति श्रृद्धा रखेंगें। इसलिए आयोजन में जीवित माता.पिता को पूजन अर्चन किया जाता है।

संस्था के सचिव स्वामीनाथ ने बताया की माता पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 लागू है। समाज में नैतिक मूल्यों की गिरावट के नाते वृद्ध मां बाप के प्रति उपेक्षा एवं तिरस्कार के मामले सामने आ रहे हैं। वृद्धों एवं मां बाप के अधिकारों के तथा इस अवस्था में उनकी उचित देखभाल एवं कल्याण के लिए व्यापक कानूनी उपबन्ध किए गए हैं। इसमें वे अपने बच्चों, बेऔलाद होने की दशा में सम्पत्ति के प्रस्तावित उत्तराधिकारियों से भरण पोषण की मांग कर सकते हैं और प्रतिकूल दशा में वृद्धाश्रमों का आश्रय ले सकते हैं।

बुजर्गों को मिल रहा योजना का लाभ

वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने को लेकर समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धावस्था पेंशन योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना का लाभ उन सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के बाशिंदों को दिया जाता है, जिनकी उम्र 60 साल से अधिक हो। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों की सालाना आय 48,400 रुपये एवं शहरी क्षेत्र के निवासियों की सालाना आय 56,460 रुपये से अधिक न हो। योजना के तहत वृद्धजन को 500 रुपये प्रति माह की दर से चार तिमाही किस्तों में पेशन की धनराशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है।

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