चीन की बर्बादी शुरू, युद्ध के लिए तैयार हुआ ये देश, सैनिकों ने थामा मोर्चा

विदेश डेस्क। भारत और चीन के बीच तना-तनी का माहौल काफी बढ़ता ही जा रहा है। अब एक और देश चीन का दुश्मन बन गया है। बीते कई दिनों से चीन और ताइवान के रिश्तों में खटास बनी हुई है। ऐसे में दक्षिणी चीन सागर में चीनी ड्रैगन द्वारा चली जा रही नापाक हरकतों को नाकाम करने के लिए ताइवान की वायुसेना ने भी युद्ध की तैयारियों को तेज कर दिया है। चीन को भापते हुए ताइवान की एयरफोर्स ने सोमवार को अपना वार्षिक हवाई युद्धाभ्‍यास शुरू कर दिया। इस बीच ताइवान के एयर डिफेंस सिस्‍टम को किसी भी हमले से निपटने के लिए निगरानी में रखा गया है।

ताइवान की सेना ने जमकर दागे गोले

चीन से विवाद से मध्य ताइवान की वायुसेना ने कहा क‍ि 35 एमएम की तोपों ने ‘दुश्‍मन’ के लड़ाकू विमानों को आकाश में बर्बाद करने के लिए जमकर गोले दागे। चीन से लगातार हो रहे हवाई अतिक्रमण के बीच ताइवान की वायुसेना ने कहा कि वह अपने एयरस्‍पेस की रक्षा करने के लिए तैयार है।

साथ ही ताइवान की वायुसेना ने बताया कि हवाई अभ्‍यास के दौरान शूटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। तोपखाना यूनिट ने रात को भी जोरदार तरीके से गोले दागकर अपनी क्षमता से दुनिया को रू-ब-रू कराया। इस दौरान ताइवान के रेडार सिस्‍टम ने पूरे आकाश पर कड़ी निगरानी रखी।

जवानों ने किया जोरदार प्रदर्शन
आगे ताइवानी वायुसेना ने कहा कि इस दौरान जवानों ने अपनी क्षमता का जोरदार प्रदर्शन किया। उधर, ताइवान की वायुसेना के फाइटर जेट ने हुआलिएन स्थित चिया शान एयरबेस पर ड्रिल किया। इस अभ्‍यास में एफ-16, स्‍वदेशी रक्षा विमान, मिराज-2000 और पी-3सी विमान हिस्‍सा ले रहे हैं।

दूसरी तरफ चीनी सेना दक्षिणी चीन सागर में एक बार फिर से ताइवान पर बड़े हमले की तैयारियों में लगी हुई है। साथ ही ताइवान से सटी हुई सीमा पर चीन ने DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल को तैनात किया है। चीन ने इस इलाके में तेजी से अपने सैनिकों की तादात को भी काफी बढ़ाया है।

ताइवान ने खरीदे S-400 एयर डिफेंस सिस्टम

इसके अलावा चीन ने ताइवान से सटी सीमा पर रूस से खरीदी गई S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को भी तैनात किया है। इसका शक्तिशाली रडार 600 किलोमीटर दूर से ही ताइवानी सेना के मिसाइलों, ड्रोन और लड़ाकू विमानों का पता लगा सकता है।

वहीं चीन का S-400 का रडार सिस्टम बहुत परिष्कृत है और पूरे ताइवान को कवर करने में सक्षम है। इसमें लगी हुई मिसाइलें ताइवान के किसी भी लड़ाकू विमान को मार गिराने में सक्षम हैं। ताइवान पर हमला करने के लिए चीन को बस हमले की वजह का इंतजार है।

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