कोरोना के साथ ही डेंगू, चिकनगुनिया  के प्रकोप से बच्चों का करें बचाव: बाल रोग विशेषज्ञ

बाराबंकी। कोरोना महामारी का प्रकोप आज हम सभी के सामने है। ऐसे में कोविड सहित डेंगू, चिकनगुनिया व अन्य बीमारियों से भी सावधान होने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन फिर भी सतर्कता बेहद जरूरी है। इसको लेकर घर के आसपास जलभराव व गंदगी की अनदेखी करनी चाहिए।

जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डा. मृदुल पाण्डेय का कहना है कि मौसम का मिजाज पल-पल बदल रहा है। कभी मौसम सर्द हो जाता है तो अचानक से तेज धूप लोगों को भीषण गर्मी का एहसास कराने लगती है। ऐसे में बच्चों को लेकर हमें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि जब मौसम में बदलाव होता है तो वह हमारी इम्यूनिटी को भी बदल देता है। इससे एलर्जिक और वायरल संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है, जिन लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है या कमजोर मरीजों को शिकार बनाने में वायरस सफल रहता है। इससे वायरल बुखार व सर्दी-खांसी होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सांस के रोगी, डायबिटीज व टीबी के मरीजों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं व बच्चों के प्रति बेहद सावधान रहने की जरूरत होती है।

उन्होने बताया कि बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए उनके प्रति सचेत होने की ज्यादा जरूरत है। अभिभावक ध्यान दें कि बच्चे घर से बाहर पूरे कपड़े पहनकर जाएं। अपने आसपास कहीं पर भी पानी एकत्र न होने दें। अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो,, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन चिकित्सक को दिखाएं।

उन्होने परामर्श देते हुए कहा कि बच्चों को डेंगूं बुखार से बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दें। तेल और मसालेदार वाले खाने से परहेज करने के साथ हल्का और पौष्टिक भोजन दें। घर के बाहर नीम की पत्तियां या नारियल की छाल को जलाकर मच्छरों को दूर भगा सकते हैं। घर और आसपास के इलाके को स्वच्छ रखें। इसके अलावा मच्छर होने पर मच्छरदानी का प्रयोग करें। अपने आस-पास पूर्ण स्वच्छता रखें। समय-समय पर कीटनाशक छिड़काव कराएं।

शिशु का टीकाकरण समय पर करायें। ठन्ड़ के समय हमेशा शिशु के सर व पैर हमेशा ढक कर रखे। जिससे उन्हें ठन्ड़ आसानी से न पकड़ सके। बच्चों में ज्यादा दिन तक रहने वाला सर्दी,जुखाम निमोनिया भी हो सकता है। इसीलिए बच्चे के लिए लापरवाही न बरते, समय से इलाज करे।यदि बच्चा नवजात शिशु हैं तो उसे, रोगों की प्रतिरोधी क्षमता बनाये रखने के लिए उसे स्तनपान कराएं क्योंकि नवजात शिशु को हर बीमारी से माँ का दूध बचा सकता हैं।

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