पीएम मोदी का GST पर सबसे बड़ा यह दांव!

नई दिल्ली। देश में मध्यरात्रि से माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की शुरुआत होने पर भारत दुनिया के उन कुछ गिने चुने देशों में शामिल हो गया है जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर एक बिक्री कर लागू है। जीएसटी को आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा कर सुधार माना जा रहा है। इसके साथ ही नोटबंदी के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने जीएसटी के तौर पर सबसे बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।

बीजेपी की उम्मीदें अब जीएसटी की कामयाबी पर टिकी

देश की इकॉनमी की तेज रफ्तार से लेकर अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की उम्मीदें अब जीएसटी की कामयाबी पर टिकी हुई है। अब जब चुनाव होने में 20 महीने से कम का वक्त बचा है, मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा जुआ खेला है। अगर जीएसटी के नतीजे सरकार के मनमुताबिक नहीं हुए तो इसकी बड़ी कीमत भी मोदी सरकार को चुकानी पड़ सकती है। पीएम ने नोटबंदी के फैसले की तरह इस बार भी जीएसटी की जिम्मेदारी अपने सिर ली है। कामयाबी या असफलता, दोनों का ही सेहरा उनके सिर ही बंधेगा। जीएसटी को आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा कर सुधार माना जा रहा है। जीएसटी के लागू होने से केन्द्र और राज्यों के स्तर पर लगने वाले एक दर्जन से अधिक कर समाप्त हो जायेंगे और उनके स्थान में केवल जीएसटी लगेगा।

कांग्रेस रही इस कार्यक्रम से दूर

जीएसटी की शुरुआत के मौके पर संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और पूर्वप्रधानमंत्री देवेगोड़ा के साथ वित्त मंत्री अरूण जेटली मंच पर उपस्थित थे। इसके अलावा बालीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन, स्वर कोकिला लता मंगेशकर और प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा संसद के केंद्रीय कक्ष में तमाम सांसदों और आमंत्रित अतिथियों के साथ इस अवसर पर उपस्थित रहे। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस कार्यक्रम से दूर रही।

 

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