UP के एक ऐसा गांव जहां दीवाली पर मनाते हैं शहीद दिवस

अमरोहा । लक्ष्मी का आगमन, श्रीराम की पूजा और न जाने कितने तौर-तरीकों से दिवाली मनाई जाएगी। हर कोई दिवाली की तैयारियों में जुटा है, हर किसी को नई उम्मीद है। लेकिन अमरोहा में एक स्थान ऐसा भी है, जहां दिवाली शहीद दिवस के रुप में मनाई जाती है। बेटे के शहीद होने का जितना गम ओमप्रकाश यादव को है, उतना ही दुख जीवनसाथी को खो देने का सीमा का भी है।

अमरोहा जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी. दूर गांव इशेपुर का नजारा दिवाली पर जुदा होगा। यह हाल पिछली सात  दिवाली है, आठवीं दिवाली को मनाने केलिये ओमप्रकाश यादव का परिवार अपने पीछे छूट रही अरविंद की यादों में भी खोया है। हर साल परिवार और कुनबे के लोग दिवाली पर शहीदस्थल पर पहुंचकर दीये जलाकर अपनी दिवाली मना रहे है, जिसे देख आसपास के लेागों भी अगस्त 2010 के हादसे को नहीं भूल पाते है।

देश की सेवा करने को आर्मी में भर्ती हुए अरविंद यादव की लेह लद्दाख़ में तैनाती थी। छह अगस्त 2010 को प्राकृतिक आपदा( बादल फटने) में अरविन्द यादव ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। शहीद अरविंद की पत्नी सीमा यादव के मुताबिक दस दिन की तलाशी के बाद आर्मी के जवानों ने अरविंद की डैथ बॉडी खोज निकाली थी। लेकिन शहीद की सूचना आर्मी ने भिजवा दी थी।

तब से अब आठवीं दिवाली आ चुकी है, लेकिन अरविंद की कमी जीवन में हमेशा, हर स्थान पर दिखती है। परिजन दिवाली के दिन शहीदस्थल को बाकायदा सजाते हैं, इसके साथ ही उनकी आंखे नम हो जाती है, लेकिन सीना गर्व भी फूला रहता है कि देश की रक्षा करते हुए अरविंद शहीद हुआ है।

दोनों बेटियों को अफसर बनाना था सपना
सीमा यादव के मुताबिक उनकी दो बेटियां है, जिन्हें वह अमरोहा शहर में रहकर पढ़ा रही है। बकौल सीमा यादव, उनके पति शहीद अरविंद का

सपना था कि वह
अपनी बेटियों को बड़ा अफसर बनाएंगे, जिसके लिये वह मेहनत कर अपनी बेटियों को पढ़ाने में जुटी है।

भर आया सीमा का गला
शहीद अरविंद के बारे में ‘हिन्दुस्तान’ ने जब सीमा यादव से बात की, तो उनका गला भर आया। बकौल शहीद पत्नी देश के लिये उनके पति की जान गई है, अरविंद हमेशा अपनी डयूटी की बातें अपनी पत्नी को सुनाते थे। लेकिन किसी को क्या मालूम था कि अरविंद लेह के जिन

कठिन रास्तों की बातें अपनी पत्नी
और परिजनों को सुनाते हैं, एक दिन उन्हीं स्थानों पर गुम हो जाएंगे।

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