सपा को एक और झटका, नरेश अग्रवाल के भाई थामेंगे BJP का दामन

हरदोई । सपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल के परिवार में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सेंधमारी कर दी है। मोदी लहर में पहले लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में हरदोई जिले में नरेश के तिलस्म को तहस-नहस कर सपा की साइकिल पंक्चर करने वाली भाजपा ने अब निकाय चुनाव में कमल खिलाने के लिए नई रणनीति अपनाई है।

मंगलवार को हिन्दुस्तान से खास बातचीत के दौरान नरेश के छोटे भाई पूर्व पालिकाध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने खुलासा किया कि वे जल्द भाजपा में शामिल होंगे। सारी बातचीत फाइनल हो गई है। हाईकमान से बुलावा आते ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे।
नगर पालिका व नगर पंचायत चुनाव में भाजपा मिलेगा फायदा

एक तरफ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार पुन: नरेश को राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपने के साथ ही दो नए चेहरे राजपाल कश्यप व ऊषा वर्मा को भी अपनी टीम में रखा है। साफ संदेश दिया है कि हरदोई में वे सपा को पहले की तरह मजबूत देखना चाहते हैं। वहीं हरदोई पर सपा मुखिया के फोकस को ध्यान में रखकर भाजपा के थिंकटैंक ने निकाय चुनाव में नरेश के छोटे भाई पूर्व चेयरमैन रहे उमेश अग्रवाल पर निशाना साधा है।

हरदोई सदर सीट पर उन्हें पार्टी का टिकट देने का आफर देकर भाजपा में शामिल होने के लिए मना लिया है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इस दांव से कई दशक से हरदोई की सियासत में एकक्षत्र राज्य कर रहा नरेश का कुनबा दो खेमों में बंटेगा, जिसका सीधा लाभ पूरे जिले की नगर पालिका व नगर पंचायत की सीटों पर भाजपा को मिलेगा।

भाजपा टिकट देगी तो पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे
बातचीत में उमेश अग्रवाल ने बताया कि हरदोई शहर की जनता ने पहले उन्हें 2006 में चेयरमैन बनाया। इसके बाद उनकी पत्नी मीना अग्रवाल को जिताया। बीते 10 सालों से शहर के विकास के लिए उन्होंने जो काम किया है उसे आगे बढ़ाने के लिए भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उनका मानना है कि विकास वही करा सकता है जिसकी सरकार हो। उन्हें भाजपाई बनाने में राष्ट्रीय नेतृत्व का सर्वाधिक भूमिका है।

यदि भाजपा टिकट देगी तो पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे। पार्टी ने प्रत्याशी न बनाया तो नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अखिलेश अच्छे व्यक्ति हैं। उन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। वह जनता के लिए पार्टी बदल रहे हैं। इससे परिवार में कोई विघटन नहीं होगा। बड़े भाई से रिश्ते यथावत रहेंगे। चेयरमैन बनने से पहले वह जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी रहे हैं।

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