नही रहीं पद्म विभूषित ‘ठुमरी की रानी’ गिरिजा देवी, संगीत जगत में शोक

वाराणसी। संगीत जगत मे एक बहुत बड़ी छवि और प्रसिद्ध ‘ठुमरी की रानी’ गिरिजा देवी का बीती रात कोलकाता में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। बता दें कि गिरिजा देवी का अंतिम संस्कार काशी में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके निधन से संगीत जगत में शोक की लहर है।

गिरिजा देवी का जन्म 8 मई 1929 को बनारस में हुआ था। उन्होंने 88 साल में आखिरी सांस ली। उनका शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत और ठुमरी गायन को लोकप्रिय बनाने में बहुत बड़ा योगदान था। 1949 में 20 साल की उम्र में पहली बार अपनी कला का प्रदर्शन किया था, लेकिन पारिवारिक दबाव की वजह से पीछे हटना पड़ा। हालांक‍ि, बिहार में 1951 में अपनी गायन कला से फिर से जनता के सामने आई। उसके बाद बनारस घराने की पहचान बन गईं।

गिरिजा देवी को अब तक कई पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में उनके अतुल्यनीय योगदान के लिए उन्हें 1972 में पद्म श्री, 1989 में पद्म भूषण और 2016 में पद्म विभूषण पुरस्कार से नवाजा गया। इसके साथ ही उन्हें 1977 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2010 में संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप, 2012 में महा संगीत सम्मान पुरस्कार दिया गया था। गिरिजा देवी को 2012 में गीमा पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

2017 में अंतिम बार आई थी घर
अंतिम बार गिरजा देवी अपने घर 24 अप्रैल 2017 को आई थी। तब वह सुर गंगा के नाम से आयोजित एक संगीत कार्यक्रम में पहुंची थी। उनके साथ स्वर कोकिला पद्म विभूषण आशा भोंसले भी थी। काशी के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी 2 गायिकाएं एक ही मंच पर थी। आशा भोंसले ने गिरजा देवी के पैर छू कर आशीर्वाद लिया था और उनके सामने वो गाने की हिम्मत तक नहीं कर पा रही थी। आशा जी ने कहा था की आर.डी.बर्मन जी भी उन्हें गिरजा देवी के गाने सुनने की बात किया करते थे।

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