गुजरात चुनाव : कांग्रेस के लिए गले की फांस बना हार्दिक

नई दिल्ली। अरक्षण को लेकर कांग्रेस को अल्टीमेटम देने के बाद हार्दिक पटेल और कांग्रेस की राहें गुजरात में जुदा होती दिखाई दे रही हैं। ऐसे में हार्दिक पटेल के किसी क्षेत्रीय दल के साथ जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। गुजरात की सियासत में यदि ऐसा होता है तो यह भाजपा के लिए संजीवनी की तरह होगा, वहीं कांग्रेस के लिए गले की फांस न बन जाए।

दरअसल हार्दिक पटेल कांग्रेस के लिए दूसरे केशूभाई पटेल साबित हो सकते हैं, जिन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थी। उस समय केशू की जीपीपी सिर्फ दो सीट ही जीत पाई थी, लेकिन दर्जनों सीटों पर कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थी। यहां बता दें कि पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) के प्रमुख हार्दिक ने पटेल आरक्षण को लेकर कांग्रेस को स्थिति साफ करने का अल्टीमेटम दिया है।

पटेलों के आरक्षण संबंधी अल्टीमेटम पर कांग्रेस फिर बड़ी परेशानी में आ गई है। ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर ओबीसी लिस्ट में पाटीदार समाज को शामिल करने का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए पटेलों के लिए आरक्षण का आश्वासन देना असंभव है। ऐसी स्थिति में हार्दिक किसी तीसरी पार्टी को समर्थन का ऐलान कर सकते हैं, ज्यादा संभावना है कि यह तीसरी पार्टी एनसीपी हो सकती है, ऐसे में कांग्रेस के वोट कट सकते हैं और इसका फायदा भी बीजेपी को होगा। अगर ऐसा हुआ तो 2012 की तरह ही पटेल वोट बीजेपी को ही फायदा पहुंचा सकते हैं।

यदि हार्दिक कांग्रेस के साथ नहीं जाते हैं तो पार्टी की दो साल की मेहनत पटेल वोटों के बंट जाने की वजह से पूरी तरह व्यर्थ हो जाएगी और इसका पूरा फायदा बीजेपी को ही जाएगा। साल 2012 में, जीपीपी ने 164 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। इनमें पार्टी दो सीटें ही जीत सकी थी। इसी के साथ जीपीपी राज्य की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी साबित हुई। जीपीपी को 3.63 प्रतिशत वोट मिले। बीजेपी को 47.9 प्रतिशत और कांग्रेस को 38.9 प्रतिशत वोट मिले। इस चुनाव में बीजेपी कांग्रेस वोट शेयर के 9 प्रतिशत के अंतर को मैनेज करने में कामयाब रही।

हार्दिक के सामने बचे 3 विकल्प
1.कांग्रेस फिलहाल पटेल आरक्षण देने से इंकार कर देगी, लेकिन हार्दिक पटेल कांग्रेस को ज्वाइन कर लेंगे। इसके बाद वह पटेल समुदाय को भाजपा के विकल्प के रूप में कांग्रेस को चुनने के लिए प्रेरित करेंगे, साथ ही उनके हक की लड़ाई जारी रखने का आश्वासन देंगे। ऐसे में पिछले चुनाव में केशूभाई पटेल के खाते में गए मत कांग्रेस को यदि मिलते हैं, तो पार्टी को राज्य में बड़ा चुनावी लाभ मिल सकता है।

2. कांग्रेस द्वारा पटेल आरक्षण पर सहमति नहीं जताने पर अपने ट्वीट के मुताबिक हार्दिक कांग्रेस और भाजपा दोनों के खिलाफ मैदान में उतर सकते हैं। हार्दिक चुनावी बिसात के जिस पायदान पर खड़े हैं, वहां से अभी नई पार्टी बनाना उनके लिए मुश्किल है। ऐसे में पटेल वोटों का बंटवारा होगा, जिसमें सबसे ज्यादा फायदे में भाजपा रहेगी।

3. कांग्रेस से निराशा हाथ आने पर पटेल एनसीपी या फिर आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ सकते हैं। एनसीपी ने पिछले चुनाव में 11 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था। इसमें से 2 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी, वहीं पार्टी का वोट शेयर महज 0.95 प्रतिशत था। ऐसे में हार्दिक का साथ मिलने पर एनसीपी को बड़ा फायदा मिल सकता है और उसका वोट शेयर बढ़कर 3 से 4 प्रतिशत के बीच पहुंचने की उम्मीद है। क्योंकि पिछले चुनाव में जीपीपी को मिले 3.63 प्रतिशत वोटों का ध्रुवीकरण हार्दिक के चलते एनसीपी में हो सकता है। इससे भी भाजपा को फायदा होगा, क्योंकि इनमें से एक बड़ा वर्ग कांग्रेस का वोट माना जाता है।

… तो भाजपा की राह हो सकती है आसान!
राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा का खुला विरोध करने के बाद अब कांग्रेस के खिलाफ भी हार्दिक ने अडिय़ल रवैया अपना लिया है। कांग्रेस से बात बिगडऩे पर हार्दिक के सामने आम आदमी पार्टी, एनसीपी या फिर निर्दलीय उम्मीदवार उतारने का रास्ता रह जाता है। कांग्रेस को छोड़कर हार्दिक इनमें से यदि कोई भी विकल्प अपनाते हैं तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। दरअसल हार्दिक सबसे ज्यादा सेंध पटेल मतों में लगाएंगे, जो कि कांग्रेस का वोटबैंक माना जाता है। इससे हार्दिक पटेल जितने ज्यादा वोट काटेंगे भाजपा की जीत का प्रतिशत उतना ही अधिक होगा। वहीं हार्दिक की शर्त मानकर कांगे्रस आरक्षण का विरोध कर रहे लोगों को नाराज नहीं कर सकती है।

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