अमरनाथ आंतकी हमले से जुड़ी 10 अहम बातें, किसका है हाथ?

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों को लेकर जा रहे बस पर हमले के लिए आतंकवादी संगठन लश्करे-तैयबा जिम्मेदार है। इस हमले में सात तीर्थयात्रियों की मौत हुई है और 19 अन्य घायल हुए हैं।

1) पुलिस पर हमले की फिराक में थे अातंकी
आतंकियों ने पहले अनंतनाग जिले के खानबल में पुलिस की गाड़ियों पर फायरिंग की थी। इस हमले में नाकाम रहने के बाद उन्होंने खानबल से एक किलोमीटर आगे बटेंगू के पास अमरनाथ यात्रियों की बस पर हमला कर दिया।

2) पीछे छूट गई थी बस
श्रीनगर से 3 बसें शाम 5ः00 बजे के करीब जम्मू के लिए रवाना हुईं थी, इनके साथ सुरक्षा काफिला भी था। लेकिन एक बस शाम 7ः00 बजे के आसपास पीछे छूट गई। बताया जा रहा है कि बस में सवार लोग खाना खाने के लिए रुक गए थे। रात 8 बजकर 20 मिनट पर जब ये बस अनंतनाग के बटेंगू के रास्ते जम्मू की तरफ आगे बढ़ रही थी, तभी आतंकी हमले की चपेट में आ गई।

3) CM मुफ्ती ने अातंकियाें काे कहा- कायर
हमले के बाद घायलों को अनंतनाग के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमले के बाद जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अस्पताल पहुंची। यहां उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, ये कायर हैं, ये हम सबका और कश्मीर का नाम बदनाम कर रहे हैं। विपक्षी दल के नेताओं ने भी इस हमले की निंदा की है।

4) हमले के पीछे लश्कर का हाथ
पुलिस महानिरीक्षक(कश्मीर रेंज) मुनीर अहमद खान ने कहा है कि अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रियों पर हमले के पीछे लश्करे -तैयबा का हाथ है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी आतंकवादी इस्माइल के निर्देश पर इस हमले को अंजाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमले में 5 से 6 आतंकवादी शामिल थे। दूसरी तरफ लश्करे-तैयबा ने इस हमले में अपने किसी आतंकवादी का हाथ होने से इंकार किया है।

5) संदीप की गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद हमला
अधिकारियों की मानें तो यह भी हो सकता है कि यह हमला सुरक्षाबलों से बदला लेने के मकसद से अंजाम दिया गया हो। खास बात यह है कि हमला उत्‍तर प्रदेश के संदीप शर्मा की गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद हुआ। संदीप कश्‍मीर में लश्‍कर का आतंकी था।वह पहला गैर-कश्‍मीरी आतंकी भी है जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

6) जम्मू बंद का आह्वान
नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस, विहिप और जेकेएनपीपी सहित कई राजनीतिक दलों ने आतंकी हमले के विरोध में आज जम्मू बंद का आव्हान किया है। बंद को देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इसके साथ ही इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है, ताकि किसी तरह की अफवाहें ना फैलें।

7) पूरे देश में हाई अलर्ट
अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले के बाद पूरे देश में हाई अलर्ट है। सूत्राें की मानें ताे पूरी रात से आतंकियों की तलाश में सर्च ऑप्रेशन चल रहा है और चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है।

8) क्या सुरक्षा में हुई बड़ी चूक?
अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस साल बेहद पुख्ता इंतजाम किए गए थे। यात्रा रूट की सुरक्षा का जिम्मा करीब 40,000 सुरक्षाबलों पर है। आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन का मुखिया सैयद सलाउद्दीन ने भी अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले की धमकी दी थी। यात्रा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने काफी पहले से ही आतंकी हमले का अलर्ट भेजा था। अमरनाथ यात्रा के नियमों के मुताबिक 7ः00 बजे के बाद यात्रा रूट पर कोई बस नहीं जा सकती है। ऐसे में रात 8 बजकर 20 मिनट पर बस का रास्ते में होना कई सवाल खड़े करता है। क्या इसे सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा सकता है?

9) बेखौफ श्रद्धालुअाें का नया जत्था रवाना
हमले के बावजूद बेखौफ सैकड़ों श्रद्धालु आज कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पवित्र गुफा मंदिर के लिए रवाना हो गए। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के एक अधिकारी ने बताया कि यात्रा सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है और आतंकी हमला तीर्थयात्रियाें के उत्साह को कम नहीं कर पाया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुन: ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए पवित्र गुफा मंदिर के मार्ग में अतिरिक्त पुलिस और अद्र्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

10) पहले भी अातंक का शिकार हुए हैं श्रद्धालु
ये पहला मौका नहीं है जब अमरनाथ यात्री अातंकी हमले का शिकार हुए हैं। इससे पहले भी यात्रियाें पर अातंकी हमले हाे चुके हैं। सबसे बड़ा आतंकी हमला 2000 में हुअा था, जिसमें 30 लोगों की जान चली गई थी। उस हमले को भी लश्‍कर ने ही अंजाम दिया था।

हमले में शामिल थे पांच से छह आतंकवादी

पुलिस महानिरीक्षक(कश्मीर रेंज) मुनीर अहमद खान ने कहा कि अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रियों पर हमले के पीछे लश्करे -तैयबा का हाथ है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी आतंकवादी इस्माइल के निर्देश पर इस हमले को अंजाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमले में पांच से छह आतंकवादी शामिल थे। दूसरी तरफ लश्करे-तैयबा ने इस हमले में अपने किसी आतंकवादी का हाथ होने से इंकार किया है।

अमरनाथ यात्रियाें पर यह वर्ष 2000 के बाद का सबसे घातक हमला है। इस हमले से पूरे देश में अाक्राेश का माहाैल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर दुख प्रकट करते हुए कहा, इस हमले से बेहद दुखी हूं, हमले की हर किसी को कड़ी निंदा करनी चाहिए। मेरी संवेदना उन सभी के परिवारों के साथ है, जिन्होंने हमले में जान गंवाई है।

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