कश्मीर में सामने आया आतंक का ये नया चेहरा

नई दिल्ली। कश्मीर में आतंक का नया चेहरा सामने आ रहा है जो बहुत खतरनाक है। आतंकवादियों ने नई व्यवस्था में पत्थरबाजों के तौर पर न केवल महिलाओं एवं बच्चों को अपनी ढाल बनाया है बल्कि महिलाओं एवं बच्चों पर आधारित खुफिया विंग भी बना लिया है।

ऐसा पहली बार हुआ है कि लश्कर-ए-तोयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे बड़े आतंकी संगठनों ने बच्चों और महिलाओं को अपने इंटैलीजैंस विंग में रखा है जो उन्हें सुरक्षा बलों की हर गतिविधि की जानकारी उपलब्ध करवाते हैं। आतंकी संगठनों द्वारा इनका प्रयोग किसी क्षेत्र विशेष की रेकी करने में भी किया जा रहा है।

27 वर्ष पूर्व घाटी में आतंकवाद शुरू होने के बाद से बच्चों और महिलाओं को इससे दूर रखा गया था। अब खुफिया एजैंसियों को ऐसी सूचना मिली है कि पिछले कुछ महीनों में बच्चों और महिलाओं की रेकी के कारण सुरक्षा बलों पर कई बड़े हमले हुए हैं।

खास तौर पर सेना के काफिले अब कहां से निकलते हैं, सी.आर.पी.एफ. और बी.एस.एफ. के शिविरों में क्या गतिविधियां चल रही हैं, ऐसी पल-पल की जानकारी यह नया खुफिया विंग ही आतंकवादियों को उपलब्ध करवाता है।

स्लीपिंग सैल हो रहे सक्रिय
कश्मीर घाटी में मुख्यत: लश्कर-ए-तोयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और जैश-ए-मोहम्मद ही आतंकी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इन ३ बड़े आतंकी सगठनों के स्लीपिंग सैल पहले से मौजूद थे लेकिन हाल के कुछ महीनों में सुरक्षा बलों द्वारा शिकंजा कसने के बाद ये बेहद सक्रिय हो गए हैं।

बैठक में लिए गए फैसले
लाहौर में हुई बैठक में तय हुआ कि चारों आतंकी संगठन एक संयुक्त कमान के तहत काम करेंगे और एक-दूसरे की मदद करेंगे। आई.एस.आई. ने संगठनों को विश्वास दिलाया है कि फंड की कमी नहीं आने दी जाएगी और हथियार व गोला-बारूद आई.एस.आई. तस्करों के माध्यम से इनके समर्थकों को पंजाब में देगी।

विदेशी सिम से बात करो
यहां सक्रिय इन खालिस्तानी आतंकवादी संगठनों के आतंकी अब देसी सिम कार्ड की जगह पाकिस्तान और विदेशों में सक्रिय अपने आकाओं से बात करने के लिए पाकिस्तान, यू.के., कैनेडा और अमरीका की मोबाइल कंपनियों के सिम कार्ड का प्रयोग किया करेंगे। इसके साथ-साथ इंटरनैट के माध्यम से आपस में बातचीत करने को कहा है।

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