राहुल बोले, 2019 में होगा महाभारत, सत्ता के नशे में चूर कौरव होंगे परास्त

नई दिल्ली : कांग्रेस का अधिवेशन इस बार भव्य भी रहा और आखिरी दिन आक्रामक भी हो गया। 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने जो पंडाल सजाया वो राहुल के पक्ष में काफी हद तक जाता दिखाई दे रहा है। अधिवेशन का आखिरी दिन है और राहुल ने महाभारत छेड़ दिया है। 2019 के महामुकाबले को राहुल गांधी ने महाभारत की तर्ज पर कौरवों और पांडवों के युद्ध पर ला खड़ा किया है। जाहिर है राहुल ने खुद को पांडवों की संज्ञा दी और मोदी सरकार पर कौरवों की तरह सत्ता भोगने का आरोप लगाया। राहुल ने कहा कि मोदी सरकार कौरवों की तरह सत्ता के नशे में है। राहुल की ये हुंकार पिछले कई समय से काफी आक्रामक रही। राहुल ने वीर सावरकर को भी अपने भाषण में नहीं छोड़ा पूरी विचारधारा को निशाना बनाकर राहुल ने कहा कि भाजपा में अंग्रेजों से लड़ने वाले नहीं दया मांगने वाले लोग थे। लेकिन जिन्होंने आजादी को अपने खून से सींचा वो कांग्रेसी विचारधारा है। देश की सबसे पुरानी पार्टी के युवा अध्यक्ष ने हिंदी और अंग्रेजी की जुगलबंदी से ऐसी-ऐसी बातों के बाण छोड़े जिससे भाजपा कितनी घायल हुई ये तो नहीं पता लेकिन कांग्रेसियों का जोश सीटी बजाने और उनके भाषणों पर उठते शोर से ही लगाया जा सकता है।

आरएसएस का नाम लेकर राहुल ने आरोप लगाया कि यही वो संगठन है जिसके चलते देश की न्यायपालिका में भूचाल आया। देश की सर्वोच्च न्यायालय से लेकर राहुल ने पत्रकारों को कहा कि आरएसएस चाहती है कि सब उसके नीचे काम करें। लेकिन अपनी जीत पर आश्वस्त राहुल ने कहा कि सिर्फ पंजा ही देश को बचा सकता है। राहुल ने यहां तक कह दिया कि अब मोदी को भी सोचना पड़ रहा है, मोदी के सूट पहनने को लेकर भी राहुल ने तीखा हमला किया, उन्होंने कहा कि मोदी जी ने सूट पहना छोड़ दिया है। राहुल ने यहां तक कह दिया कि मोदी खुद को भगवान समझते हैं। घोटालों से लेकर झूठे वादों का ठीकरा जैसे-जैसे राहुल फोड़ने लगे कांग्रेसियों में उत्साह बढ़ता गया। पुजारी तक को राहुल ने अपने हमले में लेने से नहीं बख्शा, अपने कई अनुभवों को उठाकर उन्होंने भाजपा शासन पर एक के बाद एक तगड़े हमले किए। राहुल ने अमित शाह पर भी कई आरोप मढ़े, राहुल निजी तौर से भी हमलावर होनें से नहीं कतराए।

ऐसा नहीं है कि राहुल इस दौरान अपने कार्यकर्ताओं को भूल गए। उन्होंने जोर लगाकर कहा कि कार्यकर्ताओं के साथ इंसाफ होगा, उन्हें टिकट भी मिलेगा। वहीं मोदी का सी-प्लेन में उड़ना याद दिलाकर उन्होंने कार्यकर्ताओं को शायद ये बताने की कोशिश की कि वो जिस पार्टी की सेवा कर रहे हैं, उसमें लोकतांत्रिक शक्ति है। कुल मिलाकर राहुल ने पैराशूट वाले नेताओं को टिकट ना देने की बात कह डाली। उड़ने की इतनी बात हुई तो राफेल का मुद्दा वो कैसे चूकते, तुरंत उन्होंने राफेल को बीच में लाकर अधिवेशन में मौजूद समस्त लोगों का दिल हाईजैक कर लिया।

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