UP सीएम के भाषण को विपक्ष ने दिया तानाशाह करार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के कल के भाषण से झल्लाए विपक्ष ने उन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

विधानसभा में नेता विपक्ष और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोविन्द चौधरी ने कहा कि कल योगी ने सदन में विपक्ष की ओर अंगुली उठा-उठाकर गंभीर आरोप लगाए।

मुख्यमंत्री को इस तरह भाषण देना शोभा नहीं देता। उन्होंने नारायण दत्त तिवारी जैसे विद्वान व्यक्ति के साथ ही कई मुख्यमंत्री देखें हैं, लेकिन इस तरह का भाषण और बोलते समय भाव भंगिमा पहली बार देखी गई।

चौधरी ने कहा कि पक्ष और विपक्ष लोकतंत्र के 2 पहिए हैं। दोनों में सामंजस्य जरुरी है, लेकिन लगता है कि सीएम को लोकतंत्र में विश्वास ही नहीं रह गया। मुख्यमंत्री की भाव भंगिमा से लगता है कि राज्य के सभी विपक्षी नेता ईमानदार नहीं हैं। सबको गलत समझना बहुत बड़ी गलती है।

उनका कहना था कि राज्य में कानून व्यवस्था काफी खराब है। समस्याएं विकराल रुप धारण कर रही हैं। इन सबसे ध्यान हटाने के लिए मुख्यमंत्री ने बदले की भावना के तहत भर्तियों की जांच कराने की घोषणा की है।

नेता विपक्ष ने कहा कि योगी दबाव की राजनीति कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में भी विरोधी दलों को दबाना चाहती है, लेकिन सपा दबने वाली नहीं है।

भाजपा के तानाशाही रवैये के खिलाफ विपक्ष एकजुट है और इसीलिए सपा, बसपा और कांग्रेस ने दिन भर विधानसभा की कार्यवाही से बाहर रहने का निर्णय लिया है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेता लालजी वर्मा ने भी योगी पर लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखने का आरोप लगाया और कहा कि सदन में जब वह व उनकी पार्टी के सदस्य बोलने के लिए खड़ो होते हैं तो भाजपा सदस्य बाधा डालते हैं।

कांग्रेस के अजय कुमार उर्फ लल्लू ने कहा कि भाजपा लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती है, इसीलिए सदन और सदन के बाहर विपक्ष के साथ लोकतांत्रिक व्यवहार नहीं करती है। उसके आचरण से तानाशाही प्रवृत्ति झलकती है।

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