M-Y फार्मूला नीतीश सरकार के फ्लोर टैस्ट को कर देगा फेल!

नई दिल्ली। बिहार के राजनीतिक गलियारों में चल रही उठापटक के बीच नीतीश कुमार के एनडीए के साथ सरकार बनाने की घोषणा बाद आरजेडी की तरफ से भी सरकार बनाने का दावा पेश करने की घोषणा की गई।

जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव की नाराजगी ने इस फार्मूले को और बल दे दिया है। एेसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं ये “एम-वाई फार्मूला” शुक्रवार को नीतीश सरकार के कॉन्फिडेंस मोशन में उलटफेर न कर दे।

एम-वाई पर लालू की पकड़ मजबूत
लंबे अरसे तक बिहार की सत्ता पर काबिज रहे लालू प्रसााद यादव की जीत की सबसे बड़ी कुंजी “एम-वाई फर्मूला” ही रहा है। यानी मुस्लिम-यादव समीकरण। जो हर चुनाव में लालू के साथ खड़ा रहा। इसके बल पर ही लगभग दो साल पहले बिहार विधानसभा चुनावों में मोदी लहर को रोककर सबसे ज्यादा सीट हासिल की।

विधानसभा की दलीय स्थिति
एेसे में उम्मीद जताई जा रही है कि 28 जुलाई को होने वाला शक्ति परीक्षण काफी दिलचस्प होने जा रहा है। बिहार की 243 विधानसभा सीटों में 80 आरजेडी, 71 जेडीयू 56 बीजेपी और 27 कांग्रेस के खाते में हैं। आरएलएसपी के दो, लोजपा के दो और हम के एक विधायक हैं। वहीं निर्दलीय और अन्य पार्टियों के सात एमएलए हैं। एेसे में निर्दलीय और क्षेत्रीय पार्टियों के कुल 12 विधायक और हैं।

बहुमत से 10 ज्यादा एमएलए की दी लिस्ट
बुधवार को राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को नीतीश कुमार ने बीजेपी और जेडीयू के 124 विधायकों के अलावा 7 अन्य सहित कुल 134 विधायकों के समर्थन की सूची सौंपी थी। एेसे में एनडीए गठबंधन के पास बहुमत के 122 की संख्या से 10 विधायक ज्यादा मौजूद हैं।

 

 

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