क्या मोदी को आएगी नीतीश की ये सियासत पसंद?

नई दिल्ली। दो दिन पहले लालू का साथ छोड़कर एनडीए के खेमे में आए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुर्सी संभालने के 10 दिन बाद ही ऐसा काम करने वाले हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शायद पसंद नहीं आएगा।

नीतीश और उनकी पार्टी के विधायक भाजपा के साथ रहते हुए उपराष्ट्रपति पद के कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी को वोट करेंगे। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान नीतीश की पार्टी ने कांग्रेस के साथ सत्ता में रहते हुए भाजपा के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के लिए वोट किया था।

हालांकि नितीश बिहार के सियासी घटनाक्रम से पहले ही गांधी को समर्थन देने का फैसला कर चुके थे लेकिन बदले सियासी घटनाक्रम के बाद नीतीश की ये सियासत सियासी गलियारों में चर्चा का विष्य बनी हुई है।

गांधी को समर्थन क्यों

नीतीश की पार्टी द्वारा गांधी के समर्थन के पीछे की वजह भी राजनीतिक है। दरअसल, गांधी ने नीतीश कुमार की शराबबंदी वाली मुहिम का समर्थन किया था। अपनी इस मुहिम को मिले समर्थन के बाद ही जदयू द्वारा उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा भी शुरू हो गई थी।

हालांकि बदले हालातों में ये संभावना न के बराबर है। लेकिन उपराष्ट्रपति पद के लिए गांधी को वेट करके वह उनका सद्भाव किए रहेंगे। हालांकि गाधी को भी पता है कि आंकड़े उनके पक्ष में नहीं है और जयदू यदि उन्हें वोट कर भी दे तो वह हार का अंतर ही कम कर पाएंगे लेकिन इसके बावजूद गांधी को नीतीश का समर्थन मिलेगा।

 

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