कांग्रेस, बसपा के गठबंधन से इंकार के बाद सपा को छोटे दलों से आस


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष 2022 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश के छोटे राजनीतिक दलों की तैयारियां पूरे जोर पर है। इसी बीच कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने किसी भी दल से गठबंधन से इंकार कर दिया है। ऐसे में छोटे दलों को समाजवादी पार्टी (सपा) से बड़ी आस है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट रुप से कहा भी है कि उनकी पार्टी का वर्तमान समय में दो पार्टियों से गठबंधन है और आगे भी कुछ राजनीतिक दलों से गठबंधन होना सम्भव हैं। अभी केशव देव मौर्य की महान दल और डा. संजय चौहान की जनवादी पार्टी से सपा का गठबंधन है।

प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने बाबू सिंह कुशवाहा जैसे 09 नेताओं की पार्टियों को जोड़कर भागीदारी संकल्प मोर्चा का गठन किया है। भाजपा को हराने के नाम पर एक हुए 10 राजनीतिक दलों के अगुवा ओम प्रकाश राजभर हर बार किसी एक बड़े राजनीतिक दल से गठबंधन की बात करते रहे हैं। ओम प्रकाश ने अभी तक ये साफ नहीं किया है कि वह किस बड़े राजनीतिक दल के साथ जायेंगे।

कांग्रेस और बसपा के गठबंधन से इंकार के बाद भागीदारी संकल्प मोर्चा के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी एक विकल्प के रुप में है। पिछले दिनों ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह से एक मुलाकात भी की थी, जिसे वह औपचारिक भेंट बताते हैं। वही सपा की ओर से भागीदारी संकल्प मोर्चा से गठबंधन करने की अभी तक कोई पहल नहीं हुई है।

इन दिनों असदुद्दीन ओवैसी ने भी उत्तर प्रदेश में डेरा डाले हैं। ओवैसी की राजनीतिक सभाएं हो रही हैं। असदुद्दीन की राजनीतिक पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की प्रदेश में कोई राजनीतिक पकड़ नहीं है। बीते दिनों आजमगढ़ में ओवैसी की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत के बेटी की शादी में असदुद्दीन की मुलाकात वैवाहिक कार्यक्रम में आये शिवपाल यादव से हुई थी।

आजमगढ़ की सरजमीं पर शिवपाल और असदुद्दीन की मुलाकात का असर कुछ इस तरह का था कि दोनों करीब एक घंटे तक वार्ता करते रहें। आने वाले विधानसभा में शिवपाल यादव की प्रसपा और ओवैसी की एआईएमआईएम के गठबंधन को लेकर इसके बाद चर्चाएं जोरो पर हैं।

उत्तर प्रदेश में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से उनके चाचा और प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव से गठबंधन के द्वार खोल दिये गये हैं। दोनों गठबंधन पर बैठकर वार्ता करना चाहते हैं, लेकिन फिलहाल अखिलेश यादव सपा की राजनीतिक यात्राओं में व्यस्त हैं। दूसरी ओर शिवपाल यादव के निर्देश पर प्रसपा के प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है।

उत्तर प्रदेश से चलकर दिल्ली गयी आम आदमी पार्टी (आप) भी किसी एक दल से गठबंधन करना चाहती है लेकिन अभी उसके पास भी विकल्प समाप्त हो गये हैं। पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय सिंह गठबंधन पर विचार मंथन के बाद कुछ बोलने की बात कह रहे है।

गौरतलब है कि बीते 48 घंटे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो बड़ें पार्टियों बसपा और कांग्रेस ने किसी भी राजनीतिक दल से गठबंधन से इंकार कर के छोटे दलों के लिए रास्ते बंद कर दिये हैं। माना जा रहा है कि बहुत जल्द ही सपा के प्रदेश मुख्यालय पर छोटे दलों के गठबंधन होते हुए दिखायी देंगे
आजमगढ़ की सरजमीं पर शिवपाल और असदुद्दीन की मुलाकात का असर कुछ इस तरह का था कि दोनों करीब एक घंटे तक वार्ता करते रहें। आने वाले विधानसभा में शिवपाल यादव की प्रसपा और ओवैसी की एआईएमआईएम के गठबंधन को लेकर इसके बाद चर्चाएं जोरो पर हैं।

उत्तर प्रदेश में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से उनके चाचा और प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव से गठबंधन के द्वार खोल दिये गये हैं। दोनों गठबंधन पर बैठकर वार्ता करना चाहते हैं, लेकिन फिलहाल अखिलेश यादव सपा की राजनीतिक यात्राओं में व्यस्त हैं। दूसरी ओर शिवपाल यादव के निर्देश पर प्रसपा के प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है।

उत्तर प्रदेश से चलकर दिल्ली गयी आम आदमी पार्टी (आप) भी किसी एक दल से गठबंधन करना चाहती है लेकिन अभी उसके पास भी विकल्प समाप्त हो गये हैं। पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय सिंह गठबंधन पर विचार मंथन के बाद कुछ बोलने की बात कह रहे है।

गौरतलब है कि बीते 48 घंटे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो बड़ें पार्टियों बसपा और कांग्रेस ने किसी भी राजनीतिक दल से गठबंधन से इंकार कर के छोटे दलों के लिए रास्ते बंद कर दिये हैं। माना जा रहा है कि बहुत जल्द ही सपा के प्रदेश मुख्यालय पर छोटे दलों के गठबंधन होते हुए दिखायी देंगे

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