मुख्यमंत्री योगी मुलाकात पर राजभर ने धरना टाला

लखनऊ। भाजपा गठबंधन सरकार में शामिल सुहेल देव भासपा के अध्यक्ष और सूबे के पिछडा वर्ग तथा दिव्यांग कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद गाजीपुर में कल प्रस्तावित अपने धरने को टाल दिया।

राजभर ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथा से उनकी लगभग 35 मिनट तक बात हुई जिसमें 19 में से 17 कार्यों को तत्काल किये जाने के आदेश दिये गये जबकि दो में कार्रवाई शुरु हो गयी है। उनका कहना था कि जिलाधिकारी संजय खत्री को हटाने के भी संकेत दिये गये हैं।

गौरतलब है कि राजभर ने अपनी 19 सूत्री मागों को लेकर कल 10 बजे से धरने में बैठने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि Þमैं गठबंधन सरकार का जिमेदार मंत्री हूं।

मेरे जिले में ही जब मेरी नहीं सुनी जा रही है तो कार्यकर्ताओं की कौन सुनेगा। मैंने जिलाधिकारी से अब तक जनहित के 19 काम कहे हैं, लेकिन उन्होंने एक भी काम नहीं किया है। मैं इसके खिलाफ कल से धरने पर बैठूंगा।’

राजभर ने कहा था ‘मैंने इस संबंध में 25 जून को भाजपा के प्रदेश महासचिव (संगठन) सुनील बंसल से मुुलाकात की थी। बंसल ने मुख्यमंत्री से मिलने की सलाह दी।

27 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें एक-एक चीज की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने उन्हें गौर से सुना, लेकिन गाजीपुर के प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक से मिलने के लिए कहा। बृजेश पाठक से मिलकर सिलसिलेवार पूरा यौरा दिया, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ।’

गाजीपुर के ही जहूराबाद क्षेत्र से विधायक श्री राजभर ने कहा था कि उन्हें ताज्जुब हो रहा है कि जनहित के 19 कामों के लिए जिलाधिकारी से कहा गया, लेकिन एक भी काम नहीं हुआ।

उनका आरोप था कि जिलाधिकारी भ्रष्टाचार को बढावा दे रहे हैं और बार-बार कहते हैं कि जब उनका समाजवादी पार्टी सरकार में कुछ नहीं हुआ तो इसमें लोग क्या कर पायेंगे। उनका कहना था कि जिलाधिकारी को कहीं से राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है इसीलिये वह जनभावनाओं का लगातार निरादर कर रहे हैं।

राजभर ने कहा था कि बरदा विकास खण्ड पर कार्यरत शिक्षा अधिकारी की बहुत शिकायतें थीं। कार्यकर्ताओं ने उसके जांच की बात की। जांच तो नहीं हुई बल्कि जिलाधिकारी ने उसको एक विकास खण्ड का और प्रभार दे दिया।

कासिमाबाद के उप जिलाधिकारी को चार दिन पहले लाया गया और दो दिन बाद ही हटा दिया गया। जनता की भावनाओं से खिलवाड किया जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं का उन पर लगातार दबाव है इसलिये वह धरने पर बैठने को मजबूर हैं।

उधर, इस मामले में जिलाधिकारी संजय खत्री ने कुछ भी टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। श्री खत्री नेे फोन पर कहा, ‘मैं क्या बताऊं, मुझे नहीं बोलना चाहिये। मेरा बोलना ठीक भी नहीं है।’ दूसरी ओर, गाजीपुर के लोगों का कहना है कि ओम प्रकाश राजभर और केन्द्रीय मंत्री तथा स्थानीय सांसद मनोज सिन्हा के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता हैै।

स्थानीय अधिकारियों पर श्री सिन्हा का प्रभाव ज्यादा है। भाजपा के ही एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि श्री सिन्हा सुभासपा से गठबंधन के खिलाफ थे। वह चाहते थे कि भाजपा अपनी पार्टी के राजभर नेताओं को आगे बढ़ाये।

उन्होंने बताया कि सिन्हा चाहते थे कि भासपा का पूर्वांचल के कुछ ही जिलों में प्रभाव है, ऐसे में हर जिले में एक राजभर उम्मीदवार खड़ा कर इस जाति में अपनी ‘लीडरशिप’ उभारी जाये।

योगी सरकार के महज 104 दिन में ही गठबंधन के एक घटक की नाखुशी से राजनीतिक हल्कों में कई तरह के कयास लगने शुरु हो गये हैं। राजभर से भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता या मंत्री के अभी तक बात नहीं करने का भी लोग अपने-अपने ढंग से अर्थ निकाल रहे हैं।

कुछ का कहना है कि भाजपा सहयोगी दलों के साथ सरकार को चलाना चाहती है लेकिन उसकी मंशा है कि भाजपा मंत्रियों की तरह सहयोगी दलों के लोग भी संयमित रहें। कोई भी बात मीडिया में जाने से पहले उचित फोरम पर उठायी जाये।

 

loading...